हरेंद्र मलिक 20 साल कांग्रेस छोड़ सपा में शामिल, अखिलेश यादव ने दिलाई सदस्यता

Haimendra Singh, Last updated: Sat, 30th Oct 2021, 12:39 PM IST
  • पूर्व राज्यसभा सदस्य हरेंद्र मलिक ने कांग्रेस का साथ छोड़कर अखिलेश यादव की समाजवार्दी पार्टी का दामन थाम लिया है. मलिक ने लगभग 20 सालों बाद सपा में वापसी की है, मलिक 1998 और 1999 में मुलायल सिंह यादव के नेतृत्व में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से सपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं.
हरेंद्र मलिक कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल.

लखनऊ. चार बार विधायक और राज्यसभा सदस्य रहे हरेंद्र मलिक(Harendra Malik) ने लगभग 20 सालों बाद समाजवादी पार्टी में वापसी कर ली है. मलिक ने समाजवादी पार्टी(Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव(Akhilesh Yadav) के समक्ष पार्टी की सदस्यता ली. हरेंद्र मलिक के साथ-साथ पूर्व विधायक और उनके बेटे पंकज मलिक, चरथावल के पूर्व ब्लॉक प्रमुख जिल्ले हैदर समेत और सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस(Congress) को छोड़कर सपा का दामन थाम लिया. सपा में शामिल होने के बाद हरेंद्र मलिक ने कहा, कांग्रेस को बंजर और सपा को उपजाऊ भूमि कहा है. हरेंद्र मलिक मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा टिकट पर 1998 और 1999 में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं.

हरेंद्र मलिक का राजनीतिक सफर

हरेंद्र मलिक का राजनीतिक सफर काफी उथल-पुथल भरा रहा है. मलिक ने 1885 में खतौली विधानसभा सीट से चौधरी चरण सिंह की पार्टी लोकदल से कैरियर शुरू किया था. इसके बाद 1985 के साथ-साथ वह 1989, 1991 व 1993 में भी लोकदल टिकट से बघरा विधानसभा सीट से जीते, लेकिन 1996 में चुनाव हारने के बाद लोकदल को छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली. 1998 और 1999 में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर सपा की टिकट से चुनावी मैदान में उतरे,लेकिन दोनों ही बार उन्हें निराशा हाथ लगी.

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हरेंद्र मलिक को ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल ने 2002 में हरियाणा विधानसभा से राज्यसभा में भेज दिया. मलिक लोकदल का साथ छोडकर कांग्रेस में चले गए. कांग्रेस में शामिल होने के बाद मलिक ने अपने बेटे पंकज मलिक का राजनीति में सक्रिय किया. पंकज मलिक ने 2007 में कांग्रेस के टिकट पर बघरा विधानसभा सीट पर जीत हासिल की. लगे समय का कांग्रेस मे रहने के बाद मलिक ने एक बार फिर से समाजवादी पार्टी में शामिल होने का फैसला किया.

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