UP के पूर्व DGP सुलखान सिंह से साइबर ठग ने कहा ATM ब्लॉक है- ये डिटेल दो फिर..

Smart News Team, Last updated: Wed, 4th Aug 2021, 7:35 PM IST
  • यूपी के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह दूसरों के नाम-पता पर सिमकार्ड लेकर साइबर ठगी करने वाले गैंग का शिकार बनते-बनते बच गए. उनके मोबाइल पर फोन करके साइबर ठग ने कहा कि एटीएम ब्लॉक हो गया है आपका, ये सब डिटेल्स बता दो तो चालू हो जाएगा. सुलखान ने ठग को डांटकर फोन काटने के बाद ठग के साथ ही मोबाइल सेवा देने वाली कंपनी पर भी FIR कर दिया है. सुलखान ने कहा है कि ठगों की साजिश में मोबाइल सिम प्रदाता भी शामिल रहते हैं जो बिना नाम पता सत्यापित किए ही सिम दे देते हैं.
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ने सुलखान सिंह ने साइबर ठगों के खिलाफ लखनऊ में तहरीर दी है.

लखनऊ. देशभर में साइबर ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं. साइबर ठग भोले-भाले लोगों को अपनी बातों में फंसाकर उनसे ठगी को अंजाम देते हैं. कभी बैंककर्मी तो कभी लाखों की लॉटरी का लालच देकर लोगों के साथ लाखों की ठगी की जाती है. लेकिन इस बार इन साइबर ठगों का पाला उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह से पड़ा है. साइबर ठगों ने पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह को बैंककर्मी बनकर फोन किया. और पूर्व डीजीपी को एटीएम ब्लॉक होने का झांसा दिया. जिसके बाद उन्होंने फ़ोन करने वाले साइबर ठग को खूब फटकार लगाई.

पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश सुलखान सिंह ने बताया है कि उनके पास बैंककर्मी बताकर फोन किया गया था. फोन करने वाले कथित बैंककर्मी ने पूर्व डीजीपी को एटीएम खराब होने का झांसा दिया. और कहा कि अगर आप अपना एटीएम चालू रखना चाहते हैं तो उन्हें कुछ जानकारी बतानी होगी. सुलखान सिंह देश के बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग के मुखिया रह चुके हैं. उन्होंने तुरंत भांप लिया कि यह कोई बैंककर्मी नहीं बल्कि एक साइबर ठग है. सुलखान सिंह ने फोन पर ही ठग को खूब फटकार लगाई. जिसके बाद ठग ने फोन काट दिया. 

आरोपी साइबर ठग के खिलाफ पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने गोमतीनगर विस्तार पुलिस को तहरीर दी है. सुलखान सिंह ने तहरीर में कहा है कि ऐसे लोग गलत नाम-पते पर मोबाइल कनेक्शन लेकर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं. इनके इस षड्यंत्र में मोबाइल सिम प्रदाता भी शामिल रहते हैं. अतः अनुरोध है की कृपया मेरी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके कॉल करने वाले एवं सिम प्रदाता के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने की कृपा करें. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट समेत कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. 

पटना हाईकोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाकर लाखों रुपये की ठगी, दो को 4 साल की कैद

प्री-एक्टिवेटेड सिम से चलता है मोबाइल फोन पर मैसेज, ओटीपी से साइबरी ठगी का धंधा

देश के अलग-अलग हिस्सों में साइबरी ठगी के गिरोह जब पकड़े जाते हैं तो जांच में बार-बार प्री-एक्टिवेटेड सिम का जिक्र आता है. प्री-एक्टिवेटेड सिम मतलब जो दुकानदार के हाथ से ग्राहक के हाथ में जाने वक्त ही चालू हालत में था, यानी उससे कॉल किया जा सकता था, उस पर फोन आ सकता था और उससे मैसेज भी भेजा जा सकता था.

नियम के मुताबिक सिम कार्ड बिक्री के बाद ग्राहक के जमा कराए कागजात के आधार पर टेली वेरिफिकेशन होता है तब सिम चालू होता है. लेकिन थोड़े पैसे के लालच में दुकानदार फर्जी नाम और पता के कागज पर या असली नाम पता पर पहले सिम खरीद चुके दूसरे ग्राहकों के कागज की फोटो कॉपी करके सिम इश्यू कराते हैं और उसे चालू करवाकर रख लेते हैं. यही सिम कार्ड क्रिमिनल खरीदते हैं जिसके लिए वो ना पहचान और पता का कोई कागज नहीं देते हैं. केंद्र सरकार का नियम है कि प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड बेचने पर प्रति कनेक्शन 50 हजार रुपए जुर्माना लगेगा. 

SBI बैंक की ऐप से 12 लाख की रकम हड़पने का प्रयास, स्पेशल सेल की कार्रवाई

तुरंत पकड़े जाने की संभावना कम होने की वजह से क्रिमिनल, आतंकवादी और नक्सली ऐसे ही प्री-एक्टिवेटेड सिम पसंद करते हैं क्योंकि उसमें उनका ना नाम होता है, ना पता होता है, ना फोटो. जो भी होता है वो दूसरे का होता है और पुलिस उन तक पहुंच जाए तो भी वो कानून के चंगुल से दूर रहते हैं. पुलिस कार्ड बेचने वाले दुकानदार तक भी पहुंच जाए तो उनके पास बताने के लिए यादाश्त ही रहता है, ना कोई पेपर, ना कोई फोटो.

साइबर ठगों का भी पूरा धंधा प्री-एक्टिवेटेड सिम पर चलता है. ओडिशा, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडू, दिल्ली, यूपी, हर जगह ऐसे गैंग पकड़े गए हैं जो इस तरह का पहले से किसी और के नाम-पता पर चालू सिमकार्ड ज्यादा दाम पर दूसरे लोगों को बिना किसी नाम-पता के बेच देते थे. 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें