वाराणसी सहित 12 जिलों में नमामि गंगे योजना के तहत गंगा में छोड़ी जाएंगी 15 लाख मछलियां

Anurag Gupta1, Last updated: Wed, 29th Sep 2021, 12:02 PM IST
  • वाराणसी सहित 12 जिलों में नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी में छोड़ी जाएंगी 15 लाख मछलियां. जिसका मकसद गंगा नदी को साफ रखना है. मछलियां नाइट्रोजन की अधिकता वाले कारकों को नष्ट करेंगी.
(फाइल फोटो)

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी को साफ रखने के लिए 15 लाख मछलियां छोड़ने का फैसला लिया है. मत्स्य विभाग द्वारा गंगा नदी में कई प्रजाती की मछलियां छोड़ी जाएंगी. प्रदेश के 12 जिलों की नदियों में मछलियां छोड़ने का फैसला लिया है. ऐसा दावा किया जा रहा है मछलियां नाइट्रोजन की अधिकता वाले कारकों को नष्ट करेंगी. इस पूरी प्रक्रिया को रिवर रांचिंग कहते है जिसकी मदद से योगी सरकार गंगा की सफाई करेगी.

नमामि गंगे के तहत गंगा को साफ रखने के लिए मल को जल में जाने से रोका जा रहा है जिसके लिए एसटीपी तैयार किया जा रहा है. साथ ही गंगा को साफ रखने के लिए गंगा टास्क फोर्स सहित अनेक जतन किये जा रहे है. जिसमें योगी सरकार काफी सफल भी हुई है. इसी सफलता को बरकरार रखते हुए योगी सरकार अब रिवर रांचिंग प्रक्रिया की मदद लेने की तैयारी में है.

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डेढ़-डेढ़ लाख मछलियां छोड़ी जाएंगी:

गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, कानपुर, बहराइच, हरदोई, बिजनौर, अमरोहा, बुलंदशहर को रिवर रांचिंग प्रक्रिया में शामिल किया गया है. जिसके तहत डेढ़-डेढ़ लाख मछलियां छोड़ी जाएंगी.

नमामि गंगे के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि नदी को साफ रखने के लिए और भूगर्भ जल के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है. रिवर रांचिंग भी इसी का हिस्सा है. मत्स्य विभाग के उपनिदेशक एनएस रहमानी ने बताया गंगा के जल साफ रखने के लिए और प्रदूषण मुक्त करने लिए रिवर रांचिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल होता है. इस प्रक्रिया के तहत नदियों में अलग-अलग प्रजातियों की मछलियां छोड़ी जाती है. मछलियां नाइट्रोजन की अधिकता बढ़ाने वाले कारकों को नष्ट करती हैं. साथ ही जलीय जीव जंतुयों के लिए लाभदायक होती है. साथ ही बताया कि गंगा में अधिक मछलियां पकड़े जाने के कारण से अब सिर्फ 20 प्रतिशत ही मछलियां रह गई हैं.

रिवर रांचिंग की मुख्य वजह:

रहमानी ने बताया कि चार हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में मौजूद लगभग 1500 किलो मछलियां 1 मिलीग्राम प्रति लीटर नाइट्रोजन वेस्ट को नियंत्रित करती हैं इसलिए सरकार ने गंगा में भी लगभग 15 लाख मछलियों को छोड़ने का फैसला लिया है. रहमानी का कहना है कि हर दिन गंगा में काफी संख्या में नाइट्रोजन गिरता है यदि नाइट्रोजन 100 मिलीग्राम प्रति लीटर या इससे अधिक हो जाता है तो वो जलीय जीव जंतुयों को प्रभावित करता है. इसके कारण मछलियों के प्रजनन में समस्या आती है. वह अंडे नहीं दे पाती हैं. इससे इनकी प्राकृतिक क्षमता भी प्रभावित होती है.

इस योजना के तहत सरकार मछलियों के जरिए नदियों में प्राकृतिक जनन का कार्य शुरू करेगी क्योंकि इससे मछलियां संरक्षित होंगी और मछलियों के बढ़ने से अन्य जलीय जीवों में बढ़ोतरी होगी और प्राकृतिक प्रजनन ज्यादा होगा, जिससे नदी का प्रदूषण भी कम होगा.

 

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