यूपी में सैलरी के मामले में ग्राम प्रधानों पर पंचायत सहायक भारी, मिलेगी ज्यादा तनख्वाह

Deepakshi Sharma, Last updated: Sat, 11th Sep 2021, 3:08 PM IST
  • पंचायत सहायक सैलरी के मामले में ग्राम प्रधान पर भारी पड़ते हुए नजर आ रहे हैं. सरकार की तरफ से उनकी सैलरी 6 हजार रुपये तय की गई है. लेकिन वहीं, ग्राम प्रधान को केवल 3 हजार रुपये ही मिलते हैं. इस चीज को लेकर ग्राम प्रधानों के बीच निराशा छाई हुई है.
सैलरी के मामले में ग्राम प्रधानों पर पंचायत सहायक पड़े भारी

लखनऊ. ग्राम पंचायतों में बने पंचायत भवनों को चालने के लिए नियुक्त किए गए पंचायत सहायक सैलरी के मामले में ग्राम प्रधान से आगे निकलते दिखे हैं. सरकार की ओर से उनके लिए हर महीने 6 हजार रुपये की सैलरी तय की गई है. ग्राम प्रधान को सिर्फ साढ़े 3 हजार रुपये ही मिलते हैं. ऐसा होने से प्रधानों के मन में कुंठा और उदासी का भाव देखने को मिल रहा है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि प्रधान खुद अपने ग्राम निधि के खाते से ये रकम देंगे.

गांव वालों को सरकार की सभी सुविधाओं का लाभ मिलने वाला है. सरकार की ओर से चलाई जाने वाली अलग-अलग योजनाओं से जुड़ी जानकारी भी यही से ही मिलने वाली है. इसके लिए सरकार की ओर से सैलरी के आधार पर पंचायत सहायकों और डाटा एंट्री ऑपरेटर की भर्ती 11 महीने के लिए है. काम अच्छा होने पर उन्हें बढ़े पद पर भी बैठाया जा सकता है. पंचायत सहायकों की नियुक्ति के लिए इंटर पास की योग्यता तय की गई है. जब उनका सारा काम कंप्यूटर पर होगा. अब देखने वाली बात ये है कि पंचायत सहायक अपने काम में किसी तरह से सफल हो पाते हैं.

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प्रधानों के मन में निराशा

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि ग्राम पंचायतों में नियुक्त पंचायत सहायक ग्राम प्रधानों से ज्यादा सैलरी पाने वाले हैं. इस वक्त ग्राम प्रधान साढ़े तीन हजार रुपये ही सैलरी पा रहे हैं. वही, पंचायत सहायकों 6 हजार रुपये प्रतिमाह सैलरी मिलेगी. प्रधानों के मन में निराशा देखने को मिल रही है. ऐसा इसीलिए क्योंकि वो लंबे वक्त से सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन सरकार उनकी बातों पर बिल्कुल भी ध्यान देती नजर नहीं आ रही है.

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इस पूरे मामले को लेकर अध्यक्ष प्रधान मान सिंह गुड्डू का ये कहना है कि प्रधानों की सैलरी काफी कम है. ग्राम पंचायतों के विकास के लिए वो दिन रात खड़े रहते हैं लेकिन उन्हें जो सैलरी मिलती है वो काफी नहीं है. वो उन्हें एक तरीके से अपमानित करता है. सरकार से इसके लिए कई बार मांगी की है, लेकिन वो इस पर ध्यान नहीं देते.

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