यूपी में अब हर तरह के रोजगार से जुड़े श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी की गारंटी, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

Prince Sonker, Last updated: Thu, 16th Sep 2021, 11:38 PM IST
  • अब उत्तर प्रदेश में हर तरह के रोजगार से जुड़े श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी की गारंटी मिलेगी. इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कैबिनेट की बैठक में मजदूरी संहिता नियमावली 2021 को मंजूरी दे दी है. न्यूनतम मजदूरी की दरें तय करने के लिए प्रदेश स्तर पर एडवाइजरी बोर्ड गठित होगा जिसका कार्यकाल तीन वर्ष होगा.
उत्तर प्रदेश मजदूरी नियमावली के प्रावधानों के अनुसार मजदूरी से संबंधित विवादों का निपटारा तेजी से होगा. (प्रतीकात्मक फोटों)

लखनऊ. उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली 2021 को यूपी कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दे दी है. इसके तहत अब राज्य में हर तरह के रोजगार से जुड़े मजदूरों को दैनिक आधार पर न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारित की जाएगी. मजदूरी की न्यूनतम दर निर्धारित करते समय राज्य सरकार संबंधित भौगोलिक क्षेत्र को तीन वर्गों मेट्रोपोलिटन, गैर-मेट्रोपोलिटन व ग्रामीण क्षेत्र में विभाजित करेगी. सभी प्रकार के रोजगार के लिए न्यूनतम मजदूरी की दरें तय करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य स्तर पर एडवाइजरी बोर्ड का गठन करेगी. समूह का गठन अधिसूचना की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए किया जाएगा. इसमें राज्य सरकार द्वारा नामित अध्यक्ष, विधानमंडल के सदस्य,मजदूरी और श्रम संबंधी मामले में योग्यता रखने वाले सदस्य और सेवायोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव शामिल होंगे.

इस नियमावली के जरिए प्रदेश सरकार कर्मचारियों के काम को अब चार श्रेणियों में बाटेंगी. इसमें अकुशल, अर्द्धकुशल,कुशल और अतिकुशल श्रेणी में शमिल है. न्यूनतम मजदूरी दर अप्रैल और अक्टूबर से पूर्व तय की जाएगी. इस आधार पर कामगारों को पुनरीक्षित महंगाई भत्ता एक अप्रैल और एक अक्टूबर से दिया जाएगा. विश्राम अंतरालों को मिलाकर,किसी भी कर्मचारी के काम के घंटे 12 घंटे से अधिक नहीं होंगे. नियोजक को हर कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन का अवकाश देना होगा.

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नई नियमावली के तहत श्रम विभाग के इंस्पेक्टर की भूमिका सुविधाप्रदाता के तौर पर होगी जो मजदूरों और नियोक्ता की मदद करेगा. वह अंतिम विकल्प के तौर पर ही दंडात्मक कार्यवाही करेगा. मजदूरी से संबंधित विवाद की सुनवाई असिस्टेंट लेबर कमिश्नर करेंगे। सुनवाई में पारित आदेश के खिलाफ अपील अब जिला जज की बजाय असिसटेंट लेबर कमिश्नर से एक स्तर ऊपर के अधिकारी के समक्ष की जा सकेगी. इससे विवादों के निस्तारण में तेजी आएगी. नियमावली के प्रावधानों के उल्लंघन पर दंड में वृद्धि का प्रावधान किया गया है.

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