UP में दिल के मरीजों पर संकट, अस्पतालों में दो साल बाद मिल रही बाईपास सर्जरी की डेट

Swati Gautam, Last updated: Thu, 25th Nov 2021, 10:32 AM IST
  • यूपी में दिल का इलाज कराने वाले मरीजों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. लखनऊ के एसजीपीजीआई, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) व लोहिया संस्थान में दिल की बाईपास सर्जरी कराने वाले 500 से ज्यादा मरीज इंतजार में हैं. डॉक्टर मरीजों को सर्जरी कराने के लिए एक से दो साल बाद की तारीख दे रहे हैं.
UP में दिल के मरीजों पर संकट, अस्पतालों में दो साल बाद मिल रही बाईपास सर्जरी की डेट. file photo

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के अस्पतालों की हालत दिन प्रतिदिन खस्ता होती जा रही है जिससे इलाज कराने वाले मरीजों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. लखनऊ के एसजीपीजीआई, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) व लोहिया संस्थान में दिल की बाईपास सर्जरी कराने वाले 500 से ज्यादा मरीज इंतजार में हैं. हैरानी की बात यह है कि डॉक्टर मरीजों को सर्जरी कराने के लिए एक से दो साल बाद की तारीख दे रहे हैं. कहा जा रहा है कि ऐसा सीवीटीएस विभाग में डॉक्टरों की कमी और बाहरी मरीजों के दबाव के चलते हो रहा है जिससे मरीजों को लंबी तारीखें दी जा रही हैं.

जानकारी अनुसार अस्पतालों में दिल की धमनियों में थक्के जमने और क्षतिग्रस्त होने की समस्या वाले मरीजों की संख्या सबसे अधिक है जिन्हें बाईपास सर्जरी की सख्त जरूरत है. वॉल्व के खराब होने व दिल में छेद सहित कई अन्य समस्याएं हैं जिनमें जल्द ऑपरेशन की जरूरत होती है. लेकिन बड़ी संख्या में बाहर से आए मरीजों को शहर के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है. पीजीआई के कार्डियो वैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग में अकेले 300 से ज्यादा मरीज ऑपरेशन की प्रतीक्षा सूची में हैं. केजीएमयू व लोहिया में भी छह महीने से एक साल की तारीख दी जा रही हैं.

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सरोजनीनगर निवासी 45 वर्षीय अब्दुल रज्जाक का कहना है कि उनकी दुबई में काम के दौरान तबीयत बिगड़ी वहां के डॉक्टरों ने बाईपास सर्जरी की सलाह दी. यहां एसजीपीजीआई में दिखाया तो ऑपरेशन की तारीख दिसम्बर 2022 की मिली है. उन्हें सीने में दर्द और चलने में सांस फूलने की दिक्क्त है. वहीं बलिया निवासी रमाकांत त्रिवेदी की भी शिकायत है कि उनके 60 साल के पिता की बाईपास सर्जरी होनी है. बीएचयू के डॉक्टर ने जल्द आपरेशन की बात कहकर पीजीआई रेफर किया है. यहां डॉक्टरों ने जनवरी 2023 की तारीख दी है. पैसे न होने की वजह से अब इंतजार के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है.

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