एलयू में प्रोफेसरों की चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Smart News Team, Last updated: Tue, 16th Feb 2021, 3:49 PM IST
  • कोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को चयन प्रक्रिया जारी रखने की छूट देते हुए निर्देश दिया कि वह एंथ्रोपोलाजी विभाग में याची के लिए एक पद खाली रखेगा। अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी।
हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच 

लखनऊ : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एलयू में असिस्टेंट प्रोफेसर के 180 पदों पर चल रही चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को चयन प्रक्रिया जारी रखने की छूट देते हुए निर्देश दिया कि वह एंथ्रोपोलाजी विभाग में याची के लिए एक पद खाली रखेगा। न्यायमूर्ति इरशाद अली ने यह आदेश डॉ. प्रीति सिंह की याचिका पर दिया। अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी।

याची ने विवि में असिस्टेंट प्रोफेसर के 180 पदों पर भर्ती संबंधी 16 सितंबर 2020 के विज्ञापन में एंथ्रोपोलॉजी विभाग के चार पदों पर नियुक्ति को चुनौती दी है। याची के वकील का कहना था कि विज्ञापन के क्रम में शुरू की गई चयन प्रक्रिया में विश्वविद्यालय को एक इकाई मानकर आरक्षण लागू किया गया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे रखी है कि विषय को इकाई माना जाएगा। विवि द्वारा विज्ञापन में आरक्षण संबंधी जो मानक लिए गए हैं, जो विधि सम्मत नहीं है। एंथ्रोपोलॉजी विभाग के लिए विज्ञापित असिस्टेंट प्रोफेसर के चारो पदों पर आरक्षण लागू कर दिया गया है, जबकि याची सामान्य जाति की है और उक्त पद पर चयनित होने के लिए अर्ह होने के बावजूद आवेदन से वंचित रह गई है। 

उधर, याचिका का विरोध करते हुए यूनिवर्सिटी के वकील का कहना था कि सात मार्च 2019 को केंद्र सरकार द्वारा 10 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान लागू किया गया। लिहाजा 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पार हो गई।

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दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि यह बिंदु विचारणीय है कि क्या राज्य सरकार एक शासनादेश लाकर केंद्र सरकार द्वारा पारित एक अधिनियम के प्रविधान से यूपी लोक सेवा : अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण अधिनियम, 1994 के प्रावधानों को खत्म कर सकती है। अदालत ने राज्य सरकार व विवि को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई 10 मार्च को नियत की है।

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