इफको नैनो यूरिया का इस्तेमाल कैसे करें, कितना पानी, कब छिड़काव, प्रयोग विधि वीडियो

Smart News Team, Last updated: Fri, 30th Jul 2021, 11:03 AM IST
  • खेतों में डाले जाने वाले पारंपरिक बैग वाले यूरिया के जगह अब इफको का नैनो यूरिया लिक्विड ले रहा है. इफको का 500 मिली लीटर का नैनो यूरिया लिक्विड 21वीं सदी का उत्पाद माना जा रहा है. यह लिक्विड इस्तेमाल में काफी आसान है. इसके अलावा यह लिक्विड हवा पानी मिट्टी और पर्यावरण को सुरक्षित रखता है.
इफको का नैनो यूरिया लिक्विड. 

लखनऊ : फसलों के ग्रोथ के लिए नाइट्रोजन देना बहुत जरूरी है. आपने देखा भी होगा कि देशभर में किसान अपने फसलों में बोरी भर–भर कर यूरिया के इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब बैग वाली यूरिया की जगह तरल यूरिया की बोतल ले रही है. हाल में ही इफको ने दुनिया की पहली नैनो यूरिया तरल लॉन्च की है. जो पुराने तरीके से इस्तेमाल की जाने वाली यूरिया को कम कर देगा. इफको की 500 ml की एक बोतल का इस्तेमाल पुरानी एक बोरी बैग के बराबर ही है. साथ ही पारंपरिक यूरिया के मुकाबले लिक्विड बोतल यूरिया पर्यावरण के लिए अधिक बेहतर है. इसके इस्तेमाल से मिट्टी के स्वास्थ्य पर, फसलों को कम नुकसान और पर्यावरण का नुकसान कम होता है.

पारंपरिक बोरी वाले यूरिया के जगह पर अपने फसलों में आधा लीटर के नैनो यूरिया तरल का इस्तेमाल करना काफी आसान है. इफको के नैनो यूरिया तरल का इस्तेमाल किसान अपने खेतों में प्रति एकड़ के हिसाब से प्रति 15 लीटर स्प्रे टैंक में 30 एमएल के के बराबर डालेंगे. लिक्विड तरल के इस्तेमाल से पहले बोतल को खूब अच्छी तरीके से हिलाना चाहिए. किसानों को इस लिक्विड का इस्तेमाल दो बार करना है. किसानों को पहला छिड़काव फसल के अंकुरण के 30 दिन बाद और दूसरा छिड़काव किसान भाइयों को पहली स्प्रे के 20 से 25 दिन बाद करना है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि किसान भाइयों को छिड़काव करते समय हाथ में दस्ताने और फेस मास्क पहनना होगा.

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किसान भाइयों को यह ध्यान रखना होगा कि यह यूरिया लिक्विड तरल को ठंडी और सूखे जगह पर रखना है. सबसे जरूरी बात यह कि छोटे बच्चों और पालतू जानवरों के संपर्क में न आ पाएं. इफको कंपनी ने अपने 50 वीं वार्षिक आम सभा की बैठक में दुनिया के सामने पहले यूरिया लिक्विड तरल को 31 मई 2021 को लांच किया था. इस यूरिया लिक्विड को गुजरात के नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर में इफको की पेटेंट तकनीक के तहत विकसित किया गया है. इसको कंपनी का कहना है कि यह तरल 21वीं सदी का उत्पाद है जो मिट्टी हवा और पानी को स्वच्छ और सुरक्षित बनाते हुए. फसल का उत्पादन करेगा.

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