लखनऊ के बलरामपुर-सिविल अस्पताल में जनऔषधि केंद्रों पर दवाओं का अवैध धंधा

Smart News Team, Last updated: 03/12/2020 02:20 PM IST
  • लखनऊ के बलरामपुर सिविल अस्पताल में अफसरों के नाक के नीचे जन औषधि केंद्रों पर हो रहा दवाओं का अवैध कारोबार फार्मेसी लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद मरीजों को दवा बेच रहे कारोबारी सरकारी अफसर भी मामले को दबाने की कर रहे कोशिश, पूछने पर दे रहे गोलमोल जवाब
सिविल अस्पताल में अफसरों के नाक के नीचे जन औषधि केंद्रों पर हो रहा दवाओं का अवैध कारोबार

लखनऊ: लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है. निजी वेंडर से जन औषधि केंद्र का सरकार से करार खत्म होने के बाद भी जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की धड़ल्ले से बिक्री की जा रही है.

अधिकारियों की नाक के नीचे दवाओं का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है. मरीजों के परिजनों से महंगे दामों पर दवाइयां बेची जा रही हैं. बावजूद इसके अधिकारी आंख बंद किए हुए बैठे हैं. सरकार की योजनाओं पर दवा कारोबारी पानी फेर रहे हैं.अस्पताल परिसर व आसपास तेजी से इनका धंधा फल-फूल रहा है. अधिकारियों के रहमो करम पर दवाओं का कारोबार करने वाले वेंडर बाजार में अपनी धाक जमाए हुए बैठे हैं.

अखिलेश यादव ने CM योगी पर कसा तंज, बोले- अभिनय और भ्रमण छोड़िए प्रदेश संभालिए

राजधानी के दो बड़े अस्पतालों में अवैध तरीके से बुधवार को मरीजों को दवा बेची जा रही थी. जिस पर पूछे जाने पर अधिकारी गोलमोल जवाब देकर कन्नी काटते हुए नजर आ रहे हैं.आपको बता दें कि राजधानी में कुल 72 जन औषधि केंद्र हैं जिनमें से 12 सरकारी अस्पतालों में खुले हुए हैं. सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र संचालन के लिए सरकार द्वारा निजी वेंडर के साथ करार किया गया है.यह करार वर्तमान समय में सरकार के साथ समाप्त हो चुका है. बावजूद इसके जन औषधि केंद्र का संचालन किया जा रहा है. साथ ही अवैध दवाओं का भी कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है.

ऐसे में केंद्र सरकार के उपक्रम बीपीपीआइ व राज्य सरकार की हेल्थ एजेंसी साची ने निजी वेंडर के साथ करार समाप्त कर दिया. साथ ही दवा बिक्री पर रोक लगा दी.

लिहाजा, खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने तत्काल सभी सरकारी जनऔषधि केंद्रों का लाइसेंस निरस्त कर दिया. ऐसे में केजीएमयू, लोहिया, बीआरडी, लोकबंधु, आरएसएम अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों के जनऔषधि केंद्रों पर ताला पड़ गया. वहीं, बलरामपुर अस्पताल व सिविल अस्पताल में नियमों को ताक पर रखकर बुधवार को फार्मेसी खुलीं. निजी वेंडर द्वारा संचालित फार्मेसी में अवैध तरीके से बिक रही दवा पर अफसर भी मूक दर्शक बने हुए हैं.

गलत दवा से अनहोनी पर कौन होगा जवाबदेह

जनऔषधि केंद्रों पर हजार से अधिक दवाओं के होने का दावा किया जा रहा है. अब वेंडर से करार निरस्त होने के बावजूद कौन सी दवा बेच रहा है. किसी मरीज को गलत दवा से नुकसान होने पर जवाबदेही किसकी होगी. बिना लाइसेंस के दवाएं कैसे बिक रही हैं. इस पर जिम्मेदार खामोश हैं।

अफसरों ने कहा

मरीजों को दिक्कत न हो इसलिए जनऔषधि केंद्र खुलवाया था. इसको लेकर मैं शासन से बात करूंगा. इसके बाद बंद करने का निर्देश वेंडर को दूंगा.

डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर अस्पताल

जनऔषधि केंद्र के वेंडर का टेंडर निरस्त होने की जानकारी नहीं है. बड़े बाबू अवकाश पर थे. ऐसे में आदेश की जानकारी न होने से बुधवार को फार्मेसी खोली गई.

डॉ. एसके नंदा, सीएमएस, सिविल अस्पताल

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें