मुख्तार अंसारी की मुश्किलें नहीं हो रहीं कम, 20 साल पुराने मामले में पेश न होने पर जज नाराज

Uttam Kumar, Last updated: Wed, 3rd Nov 2021, 10:55 AM IST
  •  मुख्तार अंसारी पर 20 साल पहले राजधानी लखनऊ की जेल में बंद रहने के दौरान जेल कर्मचारियों पर पथराव करने, जानलेवा हमला करने, सरकारी कामकाज में बाधा डालने कि आरोपों के तहत मामला विचाराधीन है. इस मामले की सुनवाई के तिथि पर पेश नहीं होने पर न्यायाधीश ने जताई नाराजगी. 
मुख्तार अंसारी. फाइल फोटो

लखनऊ. दिनों दिन मुख्तार अंसारी की दिक्कतें बढ़ती ही जा रही है. मंगलवार को 20 साल पुराने मामले में लखनऊ की एमपीएमएलए कोर्ट में सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने पेश नहीं होने पर नाराजगी जताई है. दरअसल इन दिनों सजा काट रहे मुख्तार अंसारी को लखनऊ की एमपीएमएलए कोर्ट में पेश होना था. लेकिन उनको पेश नहीं किया जा सका. जिसके बाद मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी पुलिस कमिश्नर, बांदा जेल के अधीक्षक, डीएम लखनऊ व संबंधित थानेदार को पत्र लिखकर मुख्तार अंसारी को कोर्ट में पेश करने का आदेश जारी किया है. साथ ही मंगलवार को मुख्तार को क्यों नहीं पेश किया गया इस संबंध में जवाब भी मांगा है. 

दरअसल लखनऊ की एमपीएमएलए कोर्ट मुख्तार अंसारी से जुड़े 20 साल पुराने मामले की सुनवाई चल रही है. मुख्तार अंसारी पर 20 साल पहले लखनऊ की जेल में बंद रहने के दौरान जेल कर्मचारियों पर पथराव करने, जानलेवा हमला करने, सरकारी कामकाज में बाधा डालने कि आरोपों के तहत मामला दर्ज किया था. मंगलवार को इसी मामले में मुख्तार अंसारी को पेश होना था. लेकिन जेल में बंद मुख्तार अंसारी को नहीं पेश किया गया. 

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इस मामले को देखने के बाद लगता है कि इस मामले की सुनवाई में अभियोजन पक्ष की कोई रुचि नहीं है. इससे पहले भी कई मौके पर मुख्तार अंसारी को पेश करने कहा जा चुका है इसके बावजूद अभी तक कोर्ट के सामने कभी मुख्तार अंसारी को पेश नहीं किया गया. जिसके कारण गवाही भी नहीं हो पा रही है. साथ ही मुख्तार अंसारी पर आरोप भी तय नहीं हो पा रहा है. मुख्य न्यायाधीश पवन कुमार राय के अनुसार मुख्तार अंसारी को कोर्ट में पेश करने के लिए उन्होंने मुख्य सचिव से लेकर संबंधित तमाम अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं. पर अभी तक किसी के द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया. साथ ही किसी ने अभी तक रिपोर्ट भी कोर्ट को नहीं भेजी. इस मामले की सुनवाई के लिए 11 नवंबर की अगली तिथि निर्धारित की गई है.  

 

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