मौत के बाद भी भरना पड़ता है इनकम टैक्स, कानूनी वारिस की होती है जिम्मेदारी

Smart News Team, Last updated: Fri, 16th Jul 2021, 10:55 AM IST
  • आयकर नियमों के अनुसार, हर उस व्यक्ति को टैक्स देना पड़ता है जो टैक्सेबल इनकम के अंदर आता है. चाहे उस शख्स की मृत्यु ही क्यों न हो जाए.
इनकम टैक्स

टैक्स भरना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी की होती है. लेकिन क्या आपको पता है कि मौत के बाद भी टैक्स भरने की जिम्मेदारी होती है. इस बात को सुनकर को आपको हैरानी हो सकती है लेकिन आयकर नियमों के अनुसार, हर उस व्यक्ति को टैक्स देना पड़ता है जो टैक्सेबल इनकम के अंदर आता है. चाहे उस शख्स की मृत्यु ही क्यों न हो जाए. ऐसे में ITR भरने की जिम्मेदारी उसके कानूनी वारिस की होती है. इसके लिए कुछ नियम बनाए गए हैं उन नियमों के तहत आपको आईटीआर फाइल करना पड़ता है.

आयकर कानून 1961 की धारा 159 के तहत किसी व्यक्ति का निधन हो जाने के बाद उसके उत्तराधिकारी को टैक्स चुकाने के लिए इनकम टैक्स ऑफिस से संपर्क कर मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में रजिस्ट्रेशन कराना होता है. इस प्रोसेस के लिए मृत्यु प्रमाण-पत्र, मृत व्यक्ति का पैन कार्ड, कानूनी वारिस का सेल्फ-अटेस्टेड पैन कार्ड और कानूनी वारिस प्रमाण-पत्र की कॉपी की जरूरत होती है. इसके बाद ही मृत टैक्सपेयर की तरफ से टैक्स रिटर्न फाइल करने की मंजूरी मिलती है.

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टैक्स भरना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी की होती है. लेकिन क्या आपको पता है कि मौत के बाद भी टैक्स भरने की जिम्मेदारी होती है. इस बात को सुनकर को आपको हैरानी हो सकती है लेकिन आयकर नियमों के अनुसार, हर उस व्यक्ति को टैक्स देना पड़ता है जो टैक्सेबल इनकम के अंदर आता है. चाहे उस शख्स की मृत्यु ही क्यों न हो जाए. ऐसे में ITR भरने की जिम्मेदारी उसके कानूनी वारिस की होती है. इसके लिए कुछ नियम बनाए गए हैं उन नियमों के तहत आपको आईटीआर फाइल करना पड़ता है.

आयकर कानून 1961 की धारा 159 के तहत किसी व्यक्ति का निधन हो जाने के बाद उसके उत्तराधिकारी को टैक्स चुकाने के लिए इनकम टैक्स ऑफिस से संपर्क कर मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में रजिस्ट्रेशन कराना होता है. इस प्रोसेस के लिए मृत्यु प्रमाण-पत्र, मृत व्यक्ति का पैन कार्ड, कानूनी वारिस का सेल्फ-अटेस्टेड पैन कार्ड और कानूनी वारिस प्रमाण-पत्र की कॉपी की जरूरत होती है. इसके बाद ही मृत टैक्सपेयर की तरफ से टैक्स रिटर्न फाइल करने की मंजूरी मिलती है.

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इसके अलावा आईटीआर फाइल करने के लिए बैंक स्टेटमेंट, निवेश के डॉक्यूमेंट और कुछ जुड़ें दस्तावेजों की जरूरत होती है. ताकि इनकम टैक्स का आंकलन किया जा सके. अगर टैक्स पेयर ने अपने मौत से पहले वसीयत नहीं कराई है तो भारतीय उत्तराधिकारी नियम के अनुसार, जिस व्यक्ति का मृतक की संपत्ति पर हक होगा उसके आयकर संबंधी दायित्वों का भी उसे ही पालन करना होगा. व्यक्ति की मौत हो जाने पर उसका पैन रद्द करवाना जरूरी होता है. इसके लिए किसी को पैन रद्द करने के लिए इनकम टैक्स ऑफिस को आवेदन देना होगा.

 

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