अफ्रीका में भारतवंशियों को सता रही अपने गांव की याद, वापसी में आ रही ये समस्या

Smart News Team, Last updated: Fri, 16th Jul 2021, 1:48 PM IST
  • दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतवंशी करीब 160 साल पहले भारत से जहाज के माध्यम से विदेश पहुंचे थे. जहां ये लोग नाम कमाकर करोड़पति बन गए. अब इन लोगों को अपने गांव को फिर से देखने की इच्छा है. लेकिन उड़ान सेवाएं बंद होने के कारण फिलहाल वापस नहीं आ सकते है. साथ ही इन्हें अपने गांव का भी नाम याद नहीं.
दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतवंशी आना चाहते है अपने गांव (प्रतीकात्मक तस्वीर)

लखनऊ. करीब 160 साल पहले भारत से कई लोग दक्षिण अफ्रीका गए थे. जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे. विदेश में आने के बाद ये लोग खूब नाम और पैसा कमाकर करोड़पति बन गए. लेकिन इतने सालों बाद अब इन भारतवंशियों को अपने गांव और जिले की याद सता रही है. ये लोग अपने गांवों को फिर से देखना चाहते है. यूपी सरकार ने इनकी इच्छा को पूरा करने का प्रयास भी शुरू किया था. लेकिन कोविड की दूसरी लहर के कारण उड़ान सेवाओं को बंद कर दिया गया था. अब उड़ान सेवाओं के फिर से शुरू होने के बाद ही अफ्रीका में रह रहे भारतवंशी वापस अपने गांव-जिलों में आ सकेंगे.

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय महावाणिज्यिक दूत अंजू रंजन वहाँ के भारतवंशियों की इच्छा पूरी करने की कोशिश कर रहे है. उन्होंने ही बताया था कि साल 1860 में भारत के लोगों को लेकर एक जहाज दक्षिण अफ्रीका आया था. जिसमें बच्चे भी शामिल थे. अंग्रेज लोगों को भारतीय नाम बोलने और समझने में दिक्कत होती थी. इस कारण कई लोगों के नाम लिखा-पढ़ी में बदले भी गए थे. अफ्रीका आए इन भारतवंशियों से फार्म पर काम करवाया जाता है. हालांकि कई लोगों को पांच साल बाद बंधुआ मजदूरी से मुक्त कर दिया गया. लेकिन तब इनके पास वापस आने के लिए पैसे नहीं थे. लेकिन अब ये लोग आर्थिक रूप से सक्षम है और अपने गांव को देखना चाहते है.

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इस बारे में यूपी सरकार को महावाणिज्यिक दूत से जानकारी मिली थी. जिसके बाद दोनों देशों के बीच नए रिश्ते बनाने की कोशिश शुरू की गई. लेकिन देश में उड़ान सेवा के वापस शुरू होने के बाद ही यह बात आगे बढ़ सकती है. हालांकि दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतवंशियों के जिले एवं गांव को खोजना सबसे बड़ी दिक्कत है. इसकी वजह यह है कि 17वीं शताब्दी से अब तक कई गांवों के नाम बदल चुके है. इस कारण इन भारतवंशियों को अपने गांव का नाम अब पता नहीं है. लेकिन इन्हें अपने गांव जाने की इच्छा है.

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