वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में जल्द मिलेगा इंसाफ, यूपी के इन तीन जिलों में बनेंगी विशेष अदालतें

Swati Gautam, Last updated: Sun, 21st Nov 2021, 9:27 AM IST
  • वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए और पीड़ितों को जल्द न्याय मिले इसके लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. यूपी में तीन विशेष अदालत बनाई जाएंगी. ये अदालतें फिलहाल लखनऊ, नोएडा, गोरखपुर में स्थापित होंगी.
वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में जल्द मिलेगा इंसाफ, यूपी के इन तीन जिलों में बनेंगी विशेष अदालतें. file photo

लखनऊ. आए दिन देशभर में वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर क्राइम के मामलों की संख्या बढ़ती ही जा रही है ऐसे में मामले कोर्ट में जाने के बाद अपराधियों को सजा मिलने में देरी होती है. वित्तीय धोखधड़ी होने वाले पीड़ितों को जल्द न्याय मिले इसके लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. बता दें कि वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए यूपी में तीन विशेष अदालत बनाई जाएंगी. ये अदालतें फिलहाल लखनऊ, नोएडा, गोरखपुर में स्थापित होंगी. विशेष अदालत शुरू होने के बाद से इस तरह की गतिविधियों में शामिल अपराधियों को जल्द सजा दिलाई जा सकेगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिलेगा.

लखनऊ, नोएडा और गोरखपुर ने बनी इन अदालतों में वित्तीय मामलों से जुड़े आपराधिक मुकदमों की सुनवाई होगी और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े अपराधियों को अधिकतम दस साल की सजा या दस लाख रुपये का जुर्माना या दोनों सजा मिल सकेगी. जानकारी अनुसार आज हर महीने औसतन 100 शिकायतें बिल्डरों से जुड़ी आती हैं. यूपी में कार्यरत बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर अब तेजी से कार्रवाई होगी. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ईओडब्लू और यूपी पुलिस के बीच अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी.

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संस्थागत वित्त विभाग के महानिदेशक शिव कुमार यादव ने बताया कि वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही जनता के बीच जागरुकता अभियान शुरू होने वाला है जिसमें अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम 2019 के तहत बैनिंग एक्ट ग्रिवांस पोर्टल तैयार किया जाएगा जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे. इसके जरिए कोई धोखाधड़ी का शिकार व्यक्ति इस पर शिकायत दर्ज कर सकता है. वहीं, बैनिंग एक्ट के तहत हर जिले में विशेष अदालतों का गठन होगा इसके लिए उच्च न्यायालय ने मंजूरी दे दी है.

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