गर्भवती महिला को थी दिल की बीमारी, डॉक्टरों का करिश्मा, बचाई मां-बच्चे की जान

Ruchi Sharma, Last updated: Sat, 5th Mar 2022, 10:51 AM IST
  • दिल की दुलर्भ गंभीर बीमारी आईसेन मेंगर सिंड्रोम से पीड़िता का जटिल ऑपरेशन कर सुरक्षित प्रसव कराने में केजीएमयू के डॉक्टरों ने कामयाबी हासिल की है. डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती जन्मजात दिल की दुर्लभ बीमारी आईसेन मेंगर सिंड्रोम से पीड़ित हैं.
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लखनऊ. राजधानी लखनऊ के केजीएमयू में डॉक्टरों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे जच्चा-बच्चा का इलाज कर डॉक्टरों ने जान बचाई. दरअसल गर्भवती महिला दिल की दुलर्भ गंभीर बीमारी आईसेन मेंगर सिंड्रोम से पीड़ित थी. डॉक्टरों ने सुरक्षित प्रसव करा कर दोनों की जान बचाई. केजीएमयू एक लाख लोगों में महज एक मरजी वाली इस बीमारी से पीड़ित महिला की जटिल सर्जरी करने वाला प्रदेश का पहला अस्पताल बना. ऑपरेशन से प्रसव के बाद प्रसूता को तीन दिन वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. अब जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. नौ दिन चले इलाज के बाद दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया.डॉक्टरों का दावा है कि प्रदेश व केजीएमयू में पहली बार आईसेन मेंगर सिंड्रोम पीड़ित का सफल प्रसव कराया गया.

गोरखपुर निवासी गर्भवती प्रियंका पांडे को गंभीर हालत में क्वीनमेरी की इमरजेंसी में भर्ती किया गया. उस वक्त मरीज को सांस लेने में बेहद तकलीफ हो रही थी. क्वीनमेरी की चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. एसपी जैसवार ने बताया कि जांच में गर्भवती को आईसेन मेंगर सिंड्रोम की पुष्टि हुई. इस रोग से पीड़ित महिला को गर्भवती न धारण करने की सलाह दी जाती है. मगर मरीज को इसका अंदाजा नहीं था. गर्भस्थ शिशु बेहद कम दिन का होने से उसके विकास के लिए इंजेक्शन, दवाएं दी गई. तबीयत ठीक होने पर 18 फरवरी को सर्जरी कर बच्चा हुआ.

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क्या है आईसेन मेंगर सिंड्रोम

क्वीनमेरी के एमएस डॉ. एसपी जैसवार के मुताबिक आईसेन मेंगर सिंड्रोम दिल की जन्मजात बीमारी है. इस पहचानना बेहद मुश्किल होता है. देश में .003 प्रतिशत लोग इससे ग्रस्त है. दिल में चार चैम्बर होते हैं. एक तरफ शुद्ध, दूसरी तरफ अशुद्ध रक्त रहता है, जबकि दिल में शुद्ध अशुद्ध रक्त को अलग-अलग रखने के लिए एक दीवार होती है. आईसेन मेंगर सिंड्रोम की वजह से शुद्ध, अशुद्ध रक्त आपस में मिलने लगता है. अशुद्ध रक्त बढ़ने से मरीज की सांस फूलने लगती है. वह रोजमर्रा के सामान्य काम करने में भी असमर्थ हो जाता है. मर्ज गंभीर होने पर शरीर नीला पड़ने लगता है, जिससे अधिकांश मरीजों की कम सम में ही मौत हो जाती है. डब्ल्यूएचओ ने पीड़ितों को गर्भधारण न करने की सलाह दी.

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