लखीमपुर खीरी हिंसा: SIT ने अपने अफसरों का नंबर किया जारी, 'चश्मदीद गवाह आएं सामने, देंगे सुरक्षा'

Prachi Tandon, Last updated: Wed, 27th Oct 2021, 12:53 PM IST
  • लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में यूपी एसआईटी ने अपने अफसरों के नंबर जारी कर दिए हैं. इसी के साथ SIT ने चश्मदीद गवाहों से सामने आने की अपील की है.
लखीमपुर खीरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अफसरों के नंबर जारी किया. 

लखनऊ. लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जांच के लिए एसआईटी गठित की गई. एसआईटी के नंबर पब्लिक कर दिए गए हैं. इसी के साथ पुलिस ने अपील की है कि चश्मदीद गवाह सामने आएं और इस मामले में अपने बयान दर्ज कराएं. इसी के साथ किसी के पास डिजिटल सबूत है तो उसे उपलब्ध कराएं. गवाह की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा. इसी के साथ उन्हें सुरक्षा दी भी जाएगी. लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की गई थी. जिसमें जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाखुशी जाहिर की थी. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद से योगी सरकार और एसआईटी एक्टिव हो गई है.

एसआईटी ने बुधवार को प्रेस नोट जारी किया है जिसमें उन्होनें कहा कि लखीमपुर खीरी मामले में अगर किसी के पास कोई सबूत है तो वह सामने आए. साथ ही एसआईटी के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार अग्रवाल का नंबर भी दिया गयाहै. एसआईटी के नोट के अनुसार जनसाधारण से अपील करते हुए कहा गया है कि यदि कोई चश्मदीद गवाह अपना साक्ष्य दर्ज कराना चाहता है तो वह लखीमपुर खीरी स्थित पुलिस लाइंस स्थित क्राइम ब्रांच में उपस्थित हो. क्राइम ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराए. इसी के साथ एसआईटी ने अपने प्रेस नोट में कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपना नाम, पता गोपनीय रखना चाहता है तो उसका नाम पता गोपनीय रखा जाएगा. चश्मदीद गवाहों को सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी. 

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सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान यूपी सरकार से कहा था कि भीड़ 4 हजार से 5 हजार की थी और यह ज्यादातर स्थानीय लोग थे. घटना के बाद भी वह आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में इन लोगों की पहचान करने में समस्या नहीं होनी चाहिए. जिसके बाद यूपी सरकार की तरफ से वकालत कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा थाकि 68 गवाहों में से 30 के बयान दर्ज कर लिए गए हैं. 23 लोग घटना के चश्मदीद गवाह हैं और उन्होनें कार और कार के अंदर मौजूद लोगों को देखा है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया था कि रैली में तो सैंकड़ों किसान थे फिर सिर्फ 23 ही चश्मदीद क्यों हैं. सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद एसआईटी ने चश्मदीदों से सामने आने की अपील की है. 

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