अनी बुलियन में शामिल रिटायर PCS सहित 3 अरेस्ट, 13 कंपनियों से 600 करोड़ का फ्रॉड

Smart News Team, Last updated: 20/09/2020 11:51 PM IST
लखनऊ में पुलिस ने अनी बुलियन में शामिल रिटायर पीसीएस समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरोह के मास्टरमाइंड अजीत गुप्ता ने 13 कंपनियों के जरिए 3000 निवेशकों से 600 करोड़ रुपए की ठगी की है.
अनी बुलियन के मास्टरमाइंड ने पिछले 10 सालों में 13 कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी की है.

 लखनऊ. रविवार को पीजीआई पुलिस ने अनी बुलियन फर्म में शामिल रिटायर पीसीएस राम गोपाल गुप्ता सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया है. इस गिरोह का मास्टरमाइंड रामगोपाल का भाई अजीत गुप्ता है. जिसने 13 कंपनियों के जरिए पिछले 10 सालों में 3000 निवेशकों से करीब 600 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है.

जानकारी के अनुसार अनी बुलियन फर्म में शामिल वृंदावन योजना सेक्टर आठ से पुलिस ने विराट खंड के रिटायर पीसीएस राम गोपाल गुप्ता, विष्णु गुप्ता और विराम खंड के प्रदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया है.

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इंस्पेक्टर केके मिश्रा ने बताया कि रिटायर पीसीएस राम गोपाल गुप्ता सदस्य वाणिज्य कर अधिकारी के पद से रिटायर हुआ है. 16 जुलाई को इस गिरोह के मास्टरमाइंड अजीत गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. जबकि इस मामले में रामगोपाल और विष्णु फरार थे. इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए 25 -25 हज़ार रुपये का इनाम भी रखा गया था.

इंस्पेक्टर के अनुसार कंपनी निवेशकों को 40% की दर से ब्याज देने का दावा करती थी. अनी बुलियन के दफ्तर उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, प्रतापगढ़, अमेठी और सुल्तानपुर में थे. इसके अलावा दिल्ली और उत्तराखंड में भी कंपनी के ऑफिस खोले गए थे. कंपनी में एजेंटों के माध्यम से मुआवजा पाने वाले किसानों, रिटायर अधिकारी और सैन्य कर्मियों के रुपए स्कीम में लगाए जाते थे. लोगों का विश्वास कायम करने के लिए निवेशक को से एग्रीमेंट करते हुए उन्हें पोस्ट डेटेड चेक भी दिए जाते थे.

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इंस्पेक्टर ने यह भी बताया कि अभी तक अजीत की 13 कंपनियों के बारे में पता चला है. इन कंपनियों के जरिए लगभग 600 करोड़ रूपए की ठगी की गई. 8 मार्च को गोरखपुर में डीआरआई की टीम ने विष्णु गुप्ता को 8 किलो सोने और 200 किलो चांदी के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था. विष्णु कुछ वक्त पहले ही पैरोल पर छूटा है. इसके बाद वह दोबारा से निवेश पर मुनाफे का लालच देकर ठगी कर रहा था. इस दौरान विष्णु और राम गोपाल गुप्ता सहित तीन लोगों के खिलाफ पीजीआई और गोमती नगर थाने में मुकदमे दर्ज किए गए

आपको बता दें कि अजीत गुप्ता ने साल 2010 में अनी बुलियन के नाम से एक कंपनी खोली थी. प्रारंभ में निवेशकों को 10 हज़ार लगाने पर एक सौ आठ प्रतिशत की दर से मुनाफा दिया जाता था. गिरफ्तार रामगोपाल ने पुलिस को बताया कि नए निवेशकों से आई रुपये पुराने निवेशकों को मुनाफे के तौर पर दिए जाते थे. इस वजह से कम वक्त में ही अनी बुलियन ने अपना एक नाम स्थापित कर लिया था. मुनाफा होने के कारण निवेशक अपने परिचितों के रुपए भी इसमें लगवाने लगे. ऐसा करने पर निवेशक को को कमीशन भी दिया जाता था. अनी बुलियन के सफल होने के बाद अजीत में अनी कमोडिटी और अनी सिक्योरिटीज के नाम से भी फर्म बनाई. इन कंपनियों को उसने स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर करवाया था.

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गौरतलब है कि साल 2016 में नोटबंदी के कारण नए निवेशक आना बंद हो गए थे. इसके साथ ही पुराने निवेशक भी रुपए वापस करने का दबाव बनाने लगे. के बाद अजित में अपने भाई रामगोपाल और विष्णु के साथ मिलकर अनी मार्केटिंग सल्यूशन, अनी राजावत प्राइवेट लिमिटेड और अनी श्री साई इंफ्रा नाम से भी कंपनियां बनाई. इस बार इन्होंने डिटेल और रियल एस्टेट के माध्यम से पहले से अधिक मुनाफा होने का दावा कर निवेशकों को रोका.

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