कोरोना वैक्सीन बर्बादी में लखनऊ और अयोध्या टॉप पर, PM मोदी ने जताई चिंता

Smart News Team, Last updated: Tue, 23rd Mar 2021, 11:20 AM IST
  • एक वायल में 10 एमएल वैक्सीन होती है. प्रति मरीज .5 एमएल लगानी होती है. एक वायरल में नौ मरीजों को लग पाती है, बाकी इंजेक्शन की एयर निकालने में बर्बाद हो जाती है. इसके अलावा दूसरी समस्या है कि खुली वायल चार घंटे के अंदर उपयोग करनी होती है. जिन केंद्रों पर लोगों की संख्या कम होती है, वहां इस वजह से भी बर्बाद हो जाती है.
उत्तर प्रदेश के कई जिलों से वैक्सीन की बर्बादी की खबर मिल रही है. (प्रतिकात्मक फोटो)

लखनऊ- कोरोना वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए सरकार सख्त हो गई है. सरकार ने इसके लिए हर जिले में वैक्सीन की बर्बादी को रोकने के लिए नजर रखने की बात कही है. आंकड़े बताते हैं कि कोरोना वैक्सीन बर्बाद करने के मामले में लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, फर्रुखाबाद, आगरा समेत 43 जिले शामिल हैं.

बताते चलें कि सरकार ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन शुरू करवाया. उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में कोविशील्ड और कोवैक्सीन कंपनी की वैक्सीन लगाई जा रही है. बीते कुछ दिनों में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी दर्ज की गई है. इस बीच उत्तर प्रदेश के कई जिलों से वैक्सीन की बर्बादी की खबर आ रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद भी कोरोना वैक्सीन की बर्बादी पर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं. प्रधानमंत्री ने वैक्सीन की बर्बादी रोकने के अलावा वैक्सीन की बर्बादी की जानकारी मांगी. इस दौरान सबसे अधिक फोकस 10 फीसद से अधिक वैक्सीन बर्बाद करने वाले जिलों पर रहा.

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आपको बताते चलें कि एक वायल में 10 एमएल वैक्सीन होती है. प्रति मरीज .5 एमएल लगानी होती है. मेडिकल क्षेत्र से जुड़े जानकार बताते हैं कि एक वायरल में नौ मरीजों को लग पाती है, बाकी इंजेक्शन की एयर निकालने में बर्बाद हो जाती है. इसके अलावा दूसरी समस्या है कि खुली वायल चार घंटे के अंदर उपयोग करनी होती है. जिन केंद्रों पर पात्र लोगों की संख्या कम होती है, वहां इस वजह से भी बर्बाद हो जाती है.

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