लखनऊ मस्जिद के सह-मुतवल्ली की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, किया धार्मिक स्थलों की वर्तमान स्थिति बनाए रखने की मांग

Smart News Team, Last updated: Sun, 21st Mar 2021, 7:39 AM IST
  • लखनऊ के मस्जिद के सह-मुतवल्ली ने सुप्रीम कोर्ट में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका के खिलाफ याचिका दायर किया है. साथ ही सभी धार्मिक स्थलों की वर्त्तमान स्थिति बनाए रखने की मांग की है.
Supreme-Court-of-India.jpg

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक स्थलों की यथास्थिति बनाए रखने के  लिए याचिका दायर की गई है. यह याचिका प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने के लिए किया गया है. जिसे लखनऊ के टीले वाली मस्जिद के सह- मुतवल्ली ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की है. साथ ही कहा है कि देश मे धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के लिए इस एक्ट की बहुत जरूरी है. आपको बता दे कि 12 मार्च को इस एक्ट को खरिज करने के लिए याचिका दायर किया गया था. जिसे बीजेपी नेता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था.

बीजेपी नेता द्वारा प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को चुनौती देते हुए याचिका दायर की. जिसमे कहा गया कि 1991 में बना यह एक्ट हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय को उनके हक से अलग करता है. इतना ही नही यह कानून 15 अगस्त 1947 से पहले बने हुए उन सभी धार्मिक स्थलों पर दावा नहीं कर सकते है, जिन्हें विदेशी आक्रांताओं ने तोड़कर मस्जिद, दरगाह या चर्च बना दिया था. वही इस याचिका में आगे कहा गया है कि इस कानून से धार्मिक भेदभाव होता रहा है, बल्कि न्याय मांगने के मौलिक अधिकार का भी हनन करता है. 

यूपी में 24 मार्च को हजारों युवाओं को मिलेगी नौकरी, PHD से 10वीं तक के पास मौका

वही बीजेपी नेता के याचिका को खारिज करने के लिए टीले वाली मस्जिद के सह मुतवल्ली वसीर हसन ने याचिका दायर कर कहा है कि इस कानून के जरिए संसद देश मे धार्मिक स्थलों को लेकर झगड़े, देश मे शांति और विकास के लिए बनाया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि विदेशी आक्रांताओं के जरिए मंदिरों को तोड़ने के कोई ठोस सबूत नहीं है. जिसे सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मामले में भी माना है. जिसमे कहा गया है कि मस्जिद एक हिन्दू मंदिर के ढांचे के ऊपर बनी थी, लेकिन उसे बनाने के लिए मंदिर को तोड़ा गया था इसका कोई प्रमाण नहीं है.

सड़क किनारे धार्मिक स्थलों के अवैध निर्माण को हटाने के लिए कानून बनाने की तैयारी

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें