डॉक्टर ने दिया नया जीवन, पहली क्लास में पढ़ाई करने पहुंचा 15 साल का दीपक खुश

Mithilesh Kumar Patel, Last updated: Fri, 10th Dec 2021, 10:23 AM IST
  • भरपेट खाना न मिलने के चलते 12 की उम्र में हड्डियों के टेढ़ी-मेढ़ी व कमर झुकने जैसी गंभीर बीमारी की शिकायत लेकर बलरामपुर अस्पताल पहुंचे कुपोषित दीपक के पिता, उसे भर्ती कराकर छोड़ भागे. अपने बच्चे की तरह देखभाल कर अस्पतालकर्मीयों ने 15 साल की उम्र में उसका कक्षा 1 में दाखिला कराया जो अब काफी खुश है.
डॉक्टर ने दिया नया जीवन, पहली क्लास में पढ़ाई करने पहुंचा 15 साल का दीपक खुश

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिला अस्पताल के डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी कुपोषण का शिकार हुए दीपक के लिए किसी मसीहा से कम नहीं. एक समय भरपेट खाना न पाकर 12 साल की उम्र में बिमारी की चपेट में आने के बाद पिता ने डेढ़ साल पहले इलाज के लिए अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में छोड़ कर भाग गया. बेसहारा मरीज दीपक का, अस्पताल कर्मियों ने अपने बच्चे की तरह देखभाल कर जरूरी सामान, कपड़े और भोजन दिए. कुपोषण से उबरने के बाद दीपक की पढ़ाई का इंतजाम अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जीपी गुप्ता ने कराई.15 साल की उम्र के दीपक का सहारा बने डॉक्टर ने चाइल्डलाइन की मदद से निःशुल्क रहने, खाने और शिक्षा संस्कार मुहैया कराने वाली राजधानी लखनऊ के नाका, मोतीनगर स्थित “श्रीमद दयानंद बाल सदन” संस्था में दाखिला कराया. पहली कक्षा में दाखिला लेकर जब पहली बार दीपक स्कूल गया और वहां अपने नए दोस्तों से मिला तो बहुत खुश हुआ.

मिली जानकारी के मुताबिक, पहली कक्षा का विद्यार्थी 15 वर्षीय दीपक यूपी के हरदोई जिले के नन्ना पुरवा का रहने वाला है. उसके ऊपर से मां का साया बचपन में ही छीन गया. मां की मौत के बाद पिता सुरेंद्र ने उसकी ठीक से देखभाल नहीं की और भरपेट खाना यानी भोजन न मिलने के चलते 12 साल की उम्र में दीपक कुपोषण का शिकार हो गया. उसके पैर की हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी होने लगी और इस बीमारी की वजह से दीपक की कमर भी झुक गई. पिता उसकी बुरी हालत देख बलरामपुर जिला अस्पताल में इलाज के लिए ले गए. जहां दीपक को बलरामपुर अस्पताल के डाक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया. भर्ती कराने के कुछ दिन बाद दीपक के पिता उसे अस्पताल में अकेला छोड़ भाग गए. बेसहारा का सहारा बने अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जीपी गुप्ता और बाकी स्वास्थ्य कर्मियों ने दीपक का इलाज कर उसे नया जीवन दिया. इतना ही नही बाद में डॉक्टर गुप्ता ने उसके शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था भी कराई.

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डॉक्टर गुप्ता ने चाइल्डलाइन की मदद से राजधानी के जिस निःशुल्क शिक्षण संस्थान में दीपक का दाखिला करवाया है उस आर्यसमाजी संस्थान श्रीमद दयानंद बाल सदन के मंत्री अजय प्रकाश ने बताया हैं कि फिलहाल दीपक स्वस्थ है. उन्होंने दीपक के बारे में बताया कि स्कूल न जाने की वजह से उसको अभी लिखना और पढ़ना नहीं आता है. हां, अब उसे बाल सदन में अक्षरों व संख्याओं की पहचान करनी बताई जा रही है. आगे अजय ने कहा है कि यहां पढ़ बाकी बच्चों की मदद से दीपक सीख रहा है. उसे कक्षा 1 में दाखिल दिया गया है. 54 बच्चों के साथ रहकर व उनके साथ पढ़ाई करके दीपक काफी खुश है. पढ़ाई के आलावा वह बाल सदन में कराए जा रहे नियमित ध्यान और योग संस्कार को भी कर रहा है. अजय ने ये भी बताया कि दीपक के पिता के बारे में पड़ताल की गई लेकिन उनका अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है.

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