50 सालों के लिए अडानी ग्रुप के हाथ में दिया गया लखनऊ एयरपोर्ट

Smart News Team, Last updated: 02/11/2020 12:46 PM IST
  • लखनऊ एयरपोर्ट की कमान अब 50 सालों के लिए अडानी समूह के हाथों में दे दी गई है. सरकार का दावा है निजीकरण के बाद एयरपोर्ट की सुविधाओं में इजाफा होगा.
अडानी समूह के सीईओ का अभिवादन करते लखनऊ एयरपोर्ट के अधिकारी

लखनऊ: राजधानी में अमौसी स्थित चौधरी चरण सिंह अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अगले 50 साल तक के लिए अडानी समूह को दे दिया गया है. एयरपोर्ट अथारिटी और अडानी समूह के बीच सोमवार को प्रबंधन का हस्तांतरण हुआ. एयरपोर्ट और आसपास जगह जगह बोर्ड भी लग गए हैं जिनमें अडानी समूह की ओर से एयरपोर्ट पर यात्रियों के स्वागत के संदेश लिखे हैं.

जानकारी के मुताबिक एयरपोर्ट के प्रशासनिक भवन में निदेशक एके शर्मा ने अडानी सीसीएस लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के सीईओ सुरेश चन्द्र होता को जिम्मेदारी सौंपी. इस मौके पर अडानी एयरपोर्ट्स के सीईओ भी उपस्थित थे. इस हस्तांतरण के बाद से लखनऊ एयरपोर्ट का विकास, प्रबंधन, परिचालन और वित्तीय अधिकारों का निर्णय अब अडानी समूह के पास चला गया है.

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पिछले साल एयरपोर्ट के लिए सबसे ज्यादा कीमत की बोली लगाने वाले अडानी समूह को 50 साल के लिए एयरपोर्ट की कमान सौंप दी गई है. बता दें इस हस्तांतरण के बाद भी एयर ट्रैफिक कंट्रोल का जिम्मा एएआई के पास ही रहेगा. गौरतलब है कि साल 1986 में बड़े कार्पोरेट समूहों और सरकारी विमानों के लिए अमौसी एयरपोर्ट की शुरूआत हुई थी. सेना की हवाई पट्टी एयरपोर्ट के लिए दे दी गई थी. साल 2008 में इसका नाम बदल कर चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट रख दिया गया. वहीं 2012 में इसे अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा दिया गया.

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सरकार का दावा है कि एयरपोर्ट पर निजीकरण के बाद सुविधाएं बढ़ेंगी. इसके तहत अब एयरपोर्ट की जमीनों पर ही आने वाले समय में मॉल, होटल, बार बनाए जाएंगे. ऐसे में बाहर से आने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट के पास ही ठहरने समेत अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी. यही नहीं इसके साथ ही टर्मिनल बिल्डिंग में भी यात्रियों की सुविधाओं में इजाफा होगा. वर्तमान में  एयरपोर्ट के लिए टमिर्नल 3 का निर्माण भी 1400 करोड़ रुपयों की लागत से किया जा रहा है.

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