यूं ही नहीं प्रदूषण में नंबर 1 पहुंचा लखनऊ, निजी गाड़ियों के धुएं का है पूरा योगदान

Smart News Team, Last updated: 01/10/2020 10:13 PM IST
  • लखनऊ में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान ने शहर के प्रदूषण पर रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट के मुताबिक, निजी गाड़ियों के बढ़ते इस्तेमाल से शहर का प्रदूषण बढ़ रहा है. 
भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान ने लखनऊ के बढ़ते प्रदूषण पर एक रिपोर्ट जारी की.

लखनऊ. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बुधवार को अपने आंकड़े जारी किए. जिसमें राजधानी लखनऊ को देश का सबसे प्रदूषित बताया गया है. जिसके बाद भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान ने अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए शहर के वायु प्रदूषण को कम करने के सुझाव दिए. इस रिपोर्ट में निजी गाड़ियों के ज्यादा इस्तेमाल को प्रदूषण की वजह बताया.

भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि शहर में बढ़ते प्रदूषण की कई वजहें हैं लेकिन इसमें सबसे बड़ी वजह है बढ़ते वाहन. इन गाड़ियों से निकलने वाला धुएं हवा को जहरीला बना रहा है. इस रिपोर्ट में साफ-साफ बताया गया है कि निजी गाड़ियों के ज्यादा इस्तेमाल से प्रदूषण का खतरा और बढ़ता जा रहा है. इस रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में एक साल में दो लाख नई गाड़ियां बढ़ गई हैं.

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भारतीय विष अनुसंधान की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि लोग अब निजी गाड़ियों से ज्यादा चल रहे हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का कम इस्तेमाल कर रहे हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन से जनवरी 2020 में रोजाना 20 से 25 हजार लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करते थे. लॉकडाउन के बाद सितंबर 2020 में रोजाना लगभग 13 हजार लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल किया. 

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इस रिपोर्ट में सिर्फ लखनऊ के प्रदूषण की वजहें नहीं बताई हैं. इसके अलावा प्रदूषण कम करने के तरीके भी बताए. रिपोर्ट के मुतबिक, अगर निजी वाहनों का इस्तेमाल कम किया जाए, पार्किंग शुल्क की वृद्धि की जाए, सीएनजी वाहनों और सौर उर्जा को बढ़ावा दिया जाए. इसके अलावा ट्रैफिक सिंग्नल में सुधार हो और सड़क किनारे पड़े कचरे को रोज हटाया जाए.

 

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