लखनऊ में रिहायशी कॉलोनियां और अपार्टमेंट बन रहे अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना

Smart News Team, Last updated: Tue, 12th Jan 2021, 1:32 PM IST
  • लखनऊ में रिहायशी कॉलोनियां और अपार्टमेंट पूर्वांचल और बिहार के अपराधियों के लिए सुरक्षित ठीकाने बनते जा रहे हैं. इन इलाकों से बदमाश व शूटर अपना गिरोह चला रहे हैं. 
लखनऊ में रिहायशी कॉलोनियां और अपार्टमेंट अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बने.

लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ में रिहायशी कॉलोनियां और अपार्टमेंट पूर्वांचल और बिहार के अपराधियों के लिए सुरक्षित ठीकाने बनते जा रहे हैं. इसमें गोमतीनगर विस्तार, विभूतिखंड, असंल सिटी, जानकीपुरम विस्तार, गुडंबा, वृंदावन योजना जैसे इलाके शामिल हैं.

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इंदिरानगर की कॉलोनियों में रिहायश बढ़ी तो बदमाशों ने इन कॉलोनियों में सुरक्षित ठिकाने की तलाश शुरू कर दी. 90 के दशक में गोमतीनगर का इलाका विकसित हुआ तो बदमाश व शूटर यहीं से अपना गिरोह चलाने लगे.

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गोमतीनगर विस्तार के सतलज, सरयू, अलकनंदा, राप्ती, गंगा, सरस्वती, यमुना अपार्टमेंट में बिहार और पूर्वांचल के बदमाशों ने अपना ठिकाना बना लिया है. विभूतिखंड के सबसे महंगे और वीआईपी अपार्टमेंट तक अपराधियों की पहुंच हो गई है. इसके अलावा अंसल सिटी और वृंदावन कॉलोनी के अपार्टमेंट में भी अपराधियों ने सुरक्षित ठिकाने तलाश लिए हैं.

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इस तरह की कॉलोनियों में ज्यादातर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के फ्लैट हैं. साथ ही बड़े कारोबारियों और नेताओं के भी फ्लैट इस तरह की कॉलोनियों में मिल जाएंगे. फ्लैट मालिक यहां रहते नहीं हैं, उन्होंने फ्लैट की जिम्मेदारी केयरटेकर को दे रखी है. इन फ्लैटों के मालिकों किराए से मतलब रहता है. केयरटेकर बिना सत्यापन के फ्लैट किराया पर दे देते हैं.

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पूर्वांचल और बिहार के अपराधी राजधानी लखनऊ में पहले प्रॉपर्टी डीलरों को निशाना बनाते हैं फिर उनसे सुरक्षा देने के नाम पर मोटी रकम की अवैध वसूली करते हैं. इनमें से कई धीरे-धीरे प्रॉपर्टी डीलरों के कारोबारियों के हिस्सेदार भी बन जाते हैं. अगर इनका किसी खादी वाले से संबंध बन जाता है तो चुनाव में टिकट भी मिल जाता है.

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