UP में स्कूल बस किराया का नया फॉर्मूला जारी, नहीं वसूल पाएंगे छात्रों से मनमाना रेट

Somya Sri, Last updated: Sat, 1st Jan 2022, 7:58 AM IST
  • नए साल पर यूपी में स्कूल बस किराया का नया फॉर्मूला जारी कर दिया है. जिसके तहत अब स्कूल बस छात्रों से मनमाना किराया वसूल नहीं पाएंगे. पिछले साल को ध्यान में रखते हुए यूपी सरकार ने 1648 रुपए मेंटेनेंस राशि निर्धारित की है. इसी मेंटेनेंस राशि के आधार पर स्कूली बस छात्रों से किराया ले सकेंगे.
UP में स्कूल बस किराया का नया फॉर्मूला जारी, नहीं वसूल पाएंगे छात्रों से मनमाना रेट (फाइल फोटो)

लखनऊ: नए साल पर उत्तर प्रदेश सरकार स्कूली छात्रों को राहत देते हुए बस किराया का नया फॉर्मूला जारी कर दिया है. जिसके तहत अब स्कूल बस छात्रों से मनमाना किराया वसूल नहीं पाएंगे. इसके लिए परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने आदेश जारी कर दिए हैं. यह आदेश कक्षा एक से 12 तक के स्कूलों में शिक्षा संस्थानों यानी स्कूल व कॉलेज के नाम से पंजीकृत बसों पर लागू होगा. साल 2020-21 को आधार मानते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने इस साल भी अनुरक्षण व्यय 1648 रुपये ही तय किया है. यानी इसी राशि को ध्यान में रखते हुए बस संचालक छात्रों से किराया वसूल सकेंगे.

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के 13 संभागों में अधिकतर 42 सीटों वाली बसे हैं. लेकिन अब बस में 5 अतिरिक्त सीटों को जोड़ दिया जाएगा. यानी स्कूली बसों में सीटों की संख्या 47 कर दी जाएगी. जिसके आधार पर ही यूपी शासन ने 1648 रुपए मेंटेनेंस राशि निर्धारित की है. इसी मेंटेनेंस राशि के आधार पर स्कूली बस छात्रों से किराया ले सकेंगे.

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क्या है नया फार्मूला?

जानकारी के मुताबिक स्कूली बस छात्रों से नए फार्मूले के तहत ही किराया वसूल सकेंगे. स्कूल बस संचालक छात्रों से 5 किलोमीटर तक निर्धारित शुल्क का 50 प्रतिशत किराया लेंगे. वहीं 5 से 10 किलोमीटर तक निर्धारित शुल्क का शत-प्रतिशत किराया वसूला जाएगा. वहीं जिन स्कूलों की बसे ऐसी होंगी वहां निर्धारित शुल्क से 25 फीसदी किराया ज्यादा लगेगा. जबकि 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने पर छात्रों को निर्धारित शुल्क का 25 फीसदी किराया स्कूली बस को देना होगा.परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है.

वहींफार्मूला तय करते समय वर्तमान अनुरक्षण व्यय, स्टाफ के वेतन आदि पर खर्च में हुई बढ़ोतरी और वाहन पर खर्चे में हुई बढ़ोतरी को मानक बनाया गया है.

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