संयुक्त किसान मोर्चा की लखनऊ में महापंचायत आज, अहम मांगों के साथ रणनीति पर होगी चर्चा

Swati Gautam, Last updated: Mon, 22nd Nov 2021, 9:49 AM IST
  • 40 किसान संगठनों वाला संयुक्त किसान मोर्चा आज यानी सोमवार को लखनऊ के ईको गार्डन में महापंचायत करेगा. इस महापंचायत में किसान कृषि कानूनों की वापसी के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे. इसमें भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत सहित कई अन्य प्रमुख किसान नेता भी शामिल होंगे.
संयुक्त किसान मोर्चा की लखनऊ में महापंचायत आज, अहम मांगों के साथ रणनीति पर होगी चर्चा. file photo

लखनऊ. भले ही तीन कृषि कानूनों को वापस किए जाने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दी है लेकिन किसान अभी आंदोलन से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. 40 किसान संगठनों वाला संयुक्त किसान मोर्चा आज यानी सोमवार को लखनऊ के ईको गार्डन में महापंचायत करेंगे. इस महापंचायत में किसान कृषि कानूनों की वापसी के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे. इसमें भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत सहित कई अन्य प्रमुख किसान नेता शामिल होंगे. महापंचायत के लिए राकेश टिकैत और अन्य किसान नेता रविवार की देर रात लखनऊ पहुंच गए थे.

किसानों का कहना है कि कृषि कानूनों की वापसी की प्रधानमंत्री की घोषणा तो हो गई मगर अभी बात पूरी नहीं हुई है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चाहिए वह इस पूरे मामले को लेकर एक कमेटी गठित करें और खुद उस कमेटी में शामिल हों. फिर यह कमेटी पत्र लिखकर किसान नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित करे. बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को सुबह 11 बजे की बैठक के बाद देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला पत्र जारी कर दिया. इसमें किसान मोर्चा ने अपनी छह सूत्री मांगों को रखा है. उनका कहना है कि यदि सरकार चर्चा कर उनकी जायज मांगों को मान लेती है तो वह घर वापस चले जांएगे.

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वहीं संयुक्त किसान मोर्चा के खुले पत्र में उल्लेख है कि 11 दौर वार्ता के बाद द्विपक्षीय समाधान की बजाय एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना है लेकिन हमें खुशी है कि आपने तीनों आमंत्रित करे कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है. हम इस घोषणा का स्वागत करते हैं. उम्मीद करते हैं कि आपकी सरकार इस वचन को जल्द से जल्द और पूरी तरह निभाएगी.

तीन कृषि कानून वापसी के बाद आन्दोलन वापस न लिए जाने का कारण पूछे जाने पर किसानों ने कहा कि अभी भी किसानों उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिये जाने की गारंटी का मसला हल नहीं हुआ है. आन्दोलन के दौरान जो 750 किसान शहीद हुए उनके परिजनों को समुचित मुआवजा, उनकी स्मृति में एक राष्ट्रीय स्मारक बनाए जाने और आन्दोलन के दौरान किसानों व उनके नेताओं पर दर्ज हुए मुकदमों की वापसी के मुद्दों पर भी केन्द्र सरकार से बात होनी है.

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