निजीकरण के विरोध में उतरी मायावती, कहा- सभी को अपने हक के लिए करना होगा संघर्ष

Anurag Gupta1, Last updated: Sat, 18th Dec 2021, 2:44 PM IST
  • मायावती ने बैंक निजीकरण के विरोध में बोला पूंजीपतियों के धन में विकास के बजाय देश की पूंजी में विकास चाहती है ताकि आमजन व देश का भला हो सके. बैंक कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कहा कि बैंक की देश व्यापी हड़ताल, किसानों के आंदोलन की तरह जुझारू व प्रेरणादायी है. सभी को अपने हक के लिए संघर्ष करना होगा.
बसपा सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो)

लखनऊ. बैंक के निजीकरण का विरोध बैंक कर्मचारियों के साथ सभी विपक्षी दल कर रहे हैं. इसी क्रम में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी ट्विटर के माध्यम से बैंक निजीकरण को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है. मायावती ने कहा कि ‘बीएसपी गरीब मेहनतकश जनता का दुख-दर्द समझती है. इसीलिए पूंजीपतियों के धन में विकास के बजाय देश की पूंजी में विकास चाहती है ताकि आमजन व देश का भला हो सके. इसी क्रम में सरकारी बैंक के निजीकरण की समर्थक नहीं, जबकि भाजपा जल्दबाजी करके निजीकरण में ही वयस्त है यह अति दुखद है’.

इसी क्रम में किसानों के संघर्ष का जिक्र करते हुए और बैंक निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कहा कि ‘बैंकों के निजीकरण के विरूध्द 9 लाख बैंक कर्मचारियों द्वारा अपना वेतन कटवा कर भी 16-17 दिसंबर को की गई दो दिन की देश व्यापी हड़ताल, किसानों के आंदोलन की तरह जुझारू व प्रेरणादायी है. सभी को अपने हक के लिए संघर्ष करना होगा. सरकार अपने बैंक निजीकरण पर पुनर्विचार करे. यही बीएसपी की मांग है’. बैंक के निजीकरण का विरोध और बैंक कर्मचारियों का समर्थन करते हुए सुश्री मायावती ने चुप्पी तोड़ दी है.

 

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हड़ताल से लोगों को हुई समस्या:

लंबे समय से कर्मचारी बैंक के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं. जो विरोध इधर और तेज हो गया है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको के करीब नौ लाख कर्मचारियों ने दो दिन गुरूवार और शुक्रवार को हड़ताल करने का आह्वान किया था. जिससे बैंकिग सेवाएँ काफी प्रभावित हुई है और लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ा है. एसबीआई ने अपने ग्राहकों को पहले ही सूचित किया था कि हड़ताल की वजह से चेक क्लीयरिंग और फंड ट्रांसफर जैसी सेवाएं प्रभावित हों सकती हैं.

यूनियन के नेताओं ने बताया कि इस हड़ताल का आह्वान सरकार द्वारा दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के प्रयास के खिलाफ किया गया है. सरकार ने बजट 2021-22 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव दिया था.

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