यूपी चुनाव: एबीपी-सी वोटर सर्वे में मायावती की बसपा बेहाल, बस इतनी सीटों पर हो सकती है जीत

Shubham Bajpai, Last updated: Sat, 4th Sep 2021, 11:28 AM IST
  • यूपी विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर एबीपी- सी वोटर ने एक सर्वे किया. जिसमें सभी पार्टियों की स्थिति के साथ वोटर्स के मूड को जानने की कोशिश की गई. इस सर्वे में कभी सत्ता में रही बसपा की स्थिति काफी कमजोर नजर आ रही है. सर्वे के अनुसार, इस बार भी बसपा के खाते में 20 से भी कम सीटें ही आ रही हैं. 
एबीपी-सी वोटर सर्वे में बसपा बेहाल, बस इतनी सीटों पर हो सकती जीत

लखनऊ.यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में सभी पार्टी सत्ता में आने के लिए संघर्ष कर रही है. इसी बीच कभी सत्ता में रही बहुजन समाज पार्टी अपने अस्तित्व को बचाने को लेकर इस चुनाव में लड़ती नजर आ रही है. इसी बीच एबीपी-सी वोटर सर्वे की रिपोर्ट ने प्रदेश की राजनीति में हलचल लाने के साथ बसपा की स्थिति और कमजोर होती दिख रही है. सर्वे में बसपा सिर्फ 15 से 16 सीटों पर सिमटी दिख रही है. वहीं, बसपा के साथ रहे कई कद्दावर नेता दूसरी पार्टियों में चले गए हैं जिसका खामियाजा भी बसपा को चुनाव में उठाना पड़ सकता है क्योंकि नेता के नाम पर सतीश चंद्र मिश्रा और बसपा सुप्रीमो मायावती के अलावा बसपा में कोई बड़ा नेता नहीं है. जिसके पूरे प्रदेश या प्रदेश के किसी वर्ग पर अच्छी पकड़ हो.

सर्वे में सीएम के चेहरे और पार्टी के तौर पर तीसरी पसंद

सी वोटर में प्रदेश की जनता ने बसपा को तीसरे स्थान पर रखा है. बतौर सीएम बसपा सुप्रीमो को प्रदेश की जनता ने तीसरे स्थान पर चुना है और 14.6 फीसदी लोग ने ही मायावती के नाम पर हामी भरी है. वहीं, सीटों की बात करें तो मायावती की बसपा को 12 से 16 सीटों पर जीत मिल सकती है और उसका वोटिंग शेयर 16 फीसदी हो सकता है, जो पिछले विधान सभा चुनाव 2017 ( 22.3) से करीब 6 फीसदी कम हैं.

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10 साल में 206 विधायक में रहे गए सिर्फ 7

बसपा को सत्ता से दूर हुए 10 साल का समय हो गया है. 2012 में सत्ता से जाने के बाद बसपा का प्रदेश में ग्राफ गिरता गया और कभी 206 विधायकों वाली पार्टी बसपा अब 7 विधायकों की रह गई. 2017 में बसपा के 19 विधायक जीतकर आए थे, जिसमें अधिकांश ने या तो पार्टी छोड़ दिया या उन्हें निकाल दिया गया. अब सिर्फ 7 विधायक वर्तमान में बसपा से हैं.

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2007 की बसपा सरकार के 15 बड़े नेता अब छोड़ चुके हैं पार्टी का साथ

बसपा के वो नेता जिनको पार्टी से पहचान मिली और 2007 में बतौर मंत्री काम किया. आज उनमें से 15 नेता पार्टी को या तो अलविदा कह चुके हैं या उन्हें निष्कासित कर दिया गया हैं. जिसमें मुस्लिम चेहरा कहे जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दाकी ने कांग्रेस, पिछड़ों की राजनीति करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य, ठाकुर जयवीर सिंह, चौधरी लक्ष्मी नारायण, फागू चौहान, धर्म सिंह सैनी, बृजेश पाठक और वेदराम भाटी बीजेपी में शामिल हो गए. वहीं, बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा ने खुद की जन अधिकारी पार्टी बना ली. इंद्रजीत सरोज और राम प्रसाद सैनी ने सपा में शामिल हो गए. वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने रामवीर उपाध्याय, राम अचल राजभर और लाल जी वर्मा जैसे नेताओं को बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

पैसे लेने के आरोप और नेताओं के जाने ने पहुंचाया नुकसान

बसपा को सबसे ज्यादा नुकसान टिकट के नाम पर पैसा लेने के आरोप लगने से हुआ. बसपा की दलित हितैषी वाली छवि को इससे काफी नुकसान हुआ. इस छवि को बिगाड़ने में बसपा के पूर्व नेताओं ने काफी योगदान दिया. वहीं, कई नेताओं के जाने से जातिगत रूप से बसपा काफी कमजोर हो गई. वर्तमान में नेताओं की कमी से जूझ रही बसपा के कई नेता दूसरी पार्टियों से जुड़ गए हैं. हालांकि मायावती समय-समय पर पैसे लेने वाले आरोपों को नकार चुकी हैं.

 

 

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