सैन्य कोर्ट ने दिया आदेश, पूर्व सैनिक के बेटे का इलाज कराए सेना

Smart News Team, Last updated: 20/11/2020 09:47 AM IST
  • सेना के किसी भी अधिकारी और कर्मचारी को न्याय दिलाने के लिए गठित एएफटी ने न्यायसंगत फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि पूर्व सैनिक के बेटे का इलाज सेना कराएगी. 
कोर्ट ने कहा है कि पूर्व सैनिक के बेटे का इलाज सेना कराएगी.

लखनऊ. सैन्य कोर्ट (सशस्त्र बल अधिकरण) ने न्यायसंगत फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि पूर्व सैनिक के 29 वर्षीय बेटे का इलाज सेना कराएगी. परंतु नियम के मुताबिक, कोई भी सैनिक अपने 25 वर्ष बेटे और 18 वर्षीय बेटी का उपचार सेना के अस्पतालों में ही करा सकता है. सेना से रिटायर्ड हो जाने वाले सैनिक के बच्चों के इलाज के लिए यह सीमा निर्धारित की गई है. यह केस रायबरेली के सेवानिवृत्त हवलदार अवधेश कुमार का है जिनके 29 वर्षीय पुत्र की अरविंद की दोनों किडनी फेल हो गई हैं.

सैनिक अपने बेटे का इलाज कराने के लिए पिछले वर्ष सेना के अस्पताल गए थे जहां उन्हें यह कहते हुए उपचार देने से मना कर दिया था कि यह बीमारी विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 की सूची से बाहर है. साथ ही बेटे की उम्र भी 25 वर्ष से ज्यादा है. जिसके बाद हवलदार ने एएफटी में अपील दायर की. इस अपील में पीड़ित के अधिवक्ता पंकज कुमार शुक्ला ने रक्षा मंत्रालय के उस पत्र का हवाला दिया था, जिसमें सैनिक के बच्चों के 40 फीसद या उससे अधिक विकलांगता होने पर सेना उपचार कराती है.

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इसके अलावा वकील ने दलील दी थी कि हवलदार का पुत्र तो 80 प्रतिशत विकलांग है. ऐसे में सेना का उपचार न देना गैर-कानूनी है. इस अपील को स्वीकार करते हुए जज यूसी श्रीवास्तव और वाइस एडमिरल एआर कर्वे की पीठ ने उसका उपचार कराने के लिए सेना को आदेश दिया.

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वहीं, एएफटी के प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील विजय कुमार पांडेय ने कहा था कि विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की लिस्ट में किडनी की बीमारी नहीं शामिल है, जो कानून के खिलाफ है. उन्होंने बताया कि पीड़ित के पुत्र का डायलिसिस वर्ष 2015 से हो रहा है. तो ऐसे में यह अधिनियम लागू नहीं होता है. लेकिन, यह दलील पीड़ित के वकील के तथ्यों के आगे नहीं टिक सकी. साथ ही पीड़ित को बेटे का इलाज कराने की सुविधा दी.

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