लापरवाही: कंटेनमेंट जोन में कहीं चल रही कोचिंग क्लास, कहीं इंतजामों की कमी

Smart News Team, Last updated: Mon, 5th Apr 2021, 9:21 PM IST
  • लखनऊ में कई क्षेत्रों में बने कंटेनमेंट जोन में विभाग की ओर से साफ लापरवाही देखने को मिल रही है. कुछ क्षेत्रों में लोग कोविड नियमों का पालन नहीं कर रहे है. तो कहीं सिर्फ औपचारिकता के लिए कंटेनमेंट जोन बनाए गए है. यहां रहने वाले लोगों को उचित व्यवस्थाएं ही उपलब्ध नहीं कराई गयी है.
लापरवाही: कंटेनमेंट जोन में कहीं चल रही कोचिंग क्लास, कहीं इंतजामों की कमी

लखनऊ. राजधानी में कोरोना की दूसरी लहर के कारण कंटेनमेंट जोन की संख्या में प्रशासन ने काफी बढ़त की है. लेकिन इन कंटेनमेंट जोन में कई क्षेत्रों पर नगर निगम की लापरवाही साफ देखने को मिल रही है. कंटेनमेंट जोन के नाम पर कुछ क्षेत्रों में कोचिंग व डांस क्लास चल रही है, तो कहीं पर लोग नियम मानने के लिए तैयार नहीं है. वहीं कुछ स्थानों पर केवल औपचारिकता के लिए नगर निगम की टीम ने बांस-बल्लियां लगाकर क्षेत्र को सील कर दिया गया. लेकिन लोगों को सरकारी स्तर से कोई हेल्पलाइन नहीं दी गई. रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोग अपने परिचितों पर निर्भर है.

पिछले दिनों केशव नगर में आठ कोरोना संक्रमितों के मिलने के बाद मरीजों के घर के बाहर बांस-बल्लियां लगाकर कंटेनमेंट जोन बनाया गया. लेकिन वहाँ रहने वाले लोग बिना मास्क लगाए घर के बाहर इकट्ठा होते है. इसके अलावा मोहल्ले में कोचिंग व डांस क्लास भी चल रही है. यहाँ की स्थानीय निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता ममता त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने इसकी शिकायत नगर निगम जोन तीन में की थी. जिसके बाद पुलिस आई और कुछ देर रूककर चली गई. लेकिन लोग यहाँ बेपरवाह ही बाहर घूम रहे है.

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वहीं नरही में दस दिन पहले नगर निगम ने क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित करके सील कर दिया. लेकिन यहाँ रहने वाले लोगों को फल, सब्जी व राशन मंगवाने के लिए कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं दिया. लोगों को जरूरत के सामान खरीदने के लिए मजबूरी में घर से बाहर जाना पड़ रहा है. इसके अलावा नगर निगम की टीम भी पहले दिन के बाद दोबारा सैनिटाइजेशन के लिए नहीं आई.

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नियम के अनुसार किसी कोरोना मरीज के मिलने पर कंटेनमेंट जोन बनाकर आस-पास के 20 घरों को सील करना होगा. लेकिन बालागंज में जनरैल गंज कॉलोनी में केवल एक घर को सील किया गया. यहाँ रहने वाले लोगों की शिकायत है कि स्वास्थ्य विभाग ने अब तक किसी की जांच भी नहीं की है. 

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वहीं आशियाना क्षेत्र के कंटेनमेंट जोन में तो न ही कोई बैरिकेंडिंग है और न ही सैनिटाइजेशन के लिए विभाग से कोई आया है. वहाँ केवल स्टिकर लगाया हुआ है, जिससे कंटेनमेंट जोन के बारे में पता चलता है. आलम यह है कि जिस आवास विकास के इंजीनियर की यहाँ ड्यूटी लगी है, उसे इस क्षेत्र में अपनी ड्यूटी के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है.

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