अब जल्दी आएगी कोरोना ओमिक्रॉन रिपोर्ट, लखनऊ में जीनोम सिक्वेंसिंग जांच शुरू

Smart News Team, Last updated: Fri, 24th Dec 2021, 6:56 PM IST
  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोरोना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग जांच की सुविधा शुरू हो गई है. अब ओमिक्रॉन एवं कोरोना वायरस के अन्य वैरिएंट की जांच के लिए सैंपल दिल्ली और बेंगलुरु नहीं भेजे जाएंगे. लखनऊ में ही जीनोम सिक्वेंसिंग होने से रिपोर्ट जल्दी आएगी.
लखनऊ में कोरोना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग सुविधा शुरू (प्रतीकात्मक फोटो)

लखनऊ: कोरोना की तीसरी लहर और ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ते खतरे के बीच उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी है. अब लखनऊ में भी कोरोना के ओमिक्रॉन और अन्य वैरिएंट की पहचान के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग लैब की शुरुआत हो गई है. सीडीआरआई और एनबीआरआई में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा शुरू की गई है. अब कोविड सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल अब बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे. इसकी जांच लखनऊ में ही हो सकेगी और रिपोर्ट के लिए मरीजों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

अब तक दिल्ली-बेंगलुरु भेजे जा रहे सैंपल

लखनऊ में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा नहीं होने से अब तक मरीजों के सैंपल बाहर भेजे जा रहे थे. सभी जगहों से सैंपल इकट्ठा कर उन्हें पहले केजीएमयू भेजा जाता. फिर वहां से सैंपल को दिल्ली और बेंगलुरु की लैब में भेजा जाता. इसकी जांच रिपोर्ट आने में 10-12 दिनों तक इंतजार करना पड़ता. कुछ केस में मरीज कोविड निगेटिव हो जाते और उसके बाद रिपोर्ट आ पाती.

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जांच रिपोर्ट जल्दी मिलेगी, ट्रैसिंग समय पर हो सकेगी

लखनऊ में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा शुरू होने से अब रिपोर्ट 4 से 7 दिन के भीतर आ जाएगी. कोविड मरीज में ओमिक्रॉन वैरिएंट है या नहीं, इसका जल्दी पता लग जाएगा. इससे संक्रमण के ज्यादा फैलने से रोक लग सकेगी. उसकी ट्रैसिंग समय पर हो सकेगी.

क्या होती है जीनोम सिक्वेंसिंग?

जीनोम सिक्वेंसिंग में हमारे शरीर की कोशिकाओं में मौजूद डीएनए और आरएनए यानी जीनोम की स्टडी की जाती है. इसमें दो जीन के बीच की दूरी और उसके व्यवहार का पता लगाया जाता है. इसी स्टडी को जीनोम सिक्वेंसिंग कहते हैं. कोरोना के सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग से वैरिएंट के बारे में जानकारी मिलती है कि ये पुराने वैरिएंट से कितना अलग है.

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