यूपी के आलू श्रीलंका और अफगानिस्तान के लोग भी खाएंगे, निर्यात पर बातचीत शुरू

Smart News Team, Last updated: 12/12/2020 12:09 AM IST
प्रदेश में हर वर्ष उत्पादकता से अधिक आलू बच जाता है. जिसका कोई इस्तेमाल नहीं हो पाता है. जिसे देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक सहकारी विपणन संघ (हॉफेड) ने उत्पादकों और निर्यातकों के बीच बैठक कराने वाले हैं. अगर परिणाम अच्छे रहते हैं तो इसकी सप्लाई श्रीलंका और अफगानिस्तान तक की सकती है.
(तस्वीर: आलू)

लखनऊ: यूपी में आलू की अतिरिक्त उत्पादकता को बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान में निर्यात किया जा सकता है. इस क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक सहकारी विपणन संघ (हॉफेड) अब इसे देखते हुए आलू उत्पादकों और निर्यातकों से बातचीत शुरू कर दी है. यदि सभी में तालमेल बैठता है तो इनकी सप्लाई नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के अलावा श्रीलंका और अफगानिस्तान तक होगी. ऐसी पहल पर करीब दो दर्जन से अधिक एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन) ने भी अपने प्रस्ताव भेजे हैं.

आलू की उत्पादकता राज्य में पिछली वर्ष 147.77 लाख टन की थी. जिसमें से मात्र 51 प्रतिशत ही घरेलू उपयोग में खपा था. जबकि 14 फीसद आलू अगले वर्ष के बीज के लिए बचा लिया गया था. बचे हुए आलू में 7 प्रतिशत को सिर्फ प्रसंस्करण उद्योग के लिए बचाया गया. वहीं, 28 फीसद आलू पूरी तरह से बच गया था. इसे देखते हुए गत वर्ष ही हॉफडे ने मदद का हाथ आगे बढ़ाकर इनकी सप्लाई दक्षिण राज्यों में कराई थी. जिसका फायदा सीधे किसान को मिला था. इसके बाबत बीते वर्ष आलू की पूर्ति नेपाल ही नहीं भूटान और बांग्लादेश में भी की गई थी.

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जो पिछले वर्ष आलू सरप्लस रह गया था उसका असल माप 40 से 50 टन का है. आपको बता दें कि यूपी में अन्य राज्यों के मुकाबले उत्पादकता की अधिका क्षमता है. जिसके चलते यहां 34 फीसदी उत्पादकता संभव हो पाती है. आंकड़ों के बाद कुल उत्पादन में देखें तो यह 147.77 लाख टना था. जिसमें से खाने के उपयोग में 75 लाख टन, बीजों के लिए 20 लाख टन, प्रसंस्करण के लिए 10 लाख टन के इस्तेमाल में खप जाता है. इसके बावजूद सरप्लस आलू 40 ले 50 लाख टन रह ही जाता है.

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देश में सबसे ज्यादा आलू का उत्पादन करने वाले राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और असम हैं. वहीं, यूपी के भीतर बात की जाए तो कानपुर, कन्नौज, फतेहपुर, फर्रुखाबाद, आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, अलीगढ़, बदायूं, मैनपुरी, इटावा, मथुरा, बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर, लखनऊ तथा उन्नाव जैसी जगहों पर इसकी खेती होती है.

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