उत्तर प्रदेश के इन शहरों में जल्द दौड़ेगी 350 इलेक्ट्रिक बसें, तैयारियां तेज

Mithilesh Kumar Patel, Last updated: Fri, 17th Dec 2021, 12:21 AM IST
  • उत्तर प्रदेश के 9 प्रमुख शहरों में जल्द ही 350 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन होने वाला है. इसके लिए तैयारियां तेज हो गई है. परिवहन विभाग की ओर से इन बसों को सिटी बस के रूप में चलाया जाएगा. ये इलेक्ट्रिक बसें सिटी की सड़को पर चक्कर लगाएगी और इससे इन इलाकों में रहने वाले लोगों को काफी फायदा मिलेगा.
प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ/मेरठ. उत्तर प्रदेश के लोगों को आरामदायक व सुरक्षित सड़क यात्रा कराने के लिए योगी सरकार पहल कर रही है. इसके तहत जल्द ही सूबे के आगरा, मेरठ, अलीगढ़, बरेली, गाजियाबाद और मथुरा समेत कुल 9 प्रमुख शहरों में 350 इलेक्ट्रिक सिटी बसें राहगीरों को यात्रा कराती नजर आएगी. सूबे की शहर के सड़को पर चक्कर लगाने के लिए इन इलेक्ट्रिक सिटी बसों पर करीब 275 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. इन इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था के लिए बुधवार को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और ग्रीनसेल मोबिलिटी के बीच एक करार पर हस्ताक्षर हुआ है. इस करार में तय हुआ है कि पीएफसी कंपनी 275 करोड़ रुपए ग्रीनसेल मोबिलिटी को उधार के तौर पर देगी. सूबे की सरकार की ओर से इस स्मार्ट पहल पर तेजी से तैयारी हो रही है.

पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन कंपनी ने जिस ग्रीनसेल मोबिलिटी के साथ मिलकर एक साझे समझौते पर हस्ताक्षर किया है दरअसल ये ग्रीनसेल देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भारत और ब्रिटेन दोनों सरकारों की सहमति से बनाया गया एक ई-मोबिलिटी प्लेटफार्म है. ग्रीनसेल ई-मोबिलिटी प्लेटफार्म इन देशों में इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन (ऑपरेशनल) में सरकार की सहयोग करती है. जिसका मुख्य मकसद है कि देश को पेट्रोल और डीजल के वाहनों की इस्तेमाल से फ्री किया जाए.

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इन बसों के परिचालन की जिम्मेदारी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन कंपनी के पास होगी. सभी इलेक्ट्रिक बसों में ड्राइवर भी इसी कंपनी के तैनात होने हैं और यही कंपनी 10 सालों तक इन बसों के संचालन (ऑपरेशन) की जिम्मेदारी अपने पास रखेगी. सभी इलेक्ट्रिक बसो के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी पीएफसी कंपनी के पास होगी. बताया जा रहा है कि मेरठ शहर की सड़कों पर इनमें से 50 इलेक्ट्रिक सिटी बसें दौड़ेंगी. जिले में इन बसों के परिचालन के लिए तैयारी भी शुरु हो गई है. बस अड्डो पर ई-चार्जिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं. इस नई इलेक्ट्रिक बस की खास बात ये है कि ई-चार्जिंग प्वाइंट पर 45 मिनट चार्ज होने के बाद यह बस 120 किमी लंबी दूरी तक की सफर करा सकेंगी. 

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केन्द्र सरकार ने फेम-II योजना के लिए आवंटित किए हैं 3,500 करोड़

बता दें कि केन्द्र सरकार ने भी इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने व बढ़ावा देने के लिए 3,500 करोड़ रुपये के आवंटन से फेम-II योजना की शुरूआत भी की है. इस फेम-II योजना का मकसद है देश में इलेक्ट्रानिक और हाइब्रिड वाहनों का विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) तेजी से हो और इन वाहनो को ज्यादा से ज्यादा लोग इस्तेमाल में भी लाएं.

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