इन्जेक्शन से डरने वालों के लिए अच्छी खबर, कोरोना वायरस की इलाज के लिए टैबलेट तैयार

Uttam Kumar, Last updated: Sat, 6th Nov 2021, 9:09 AM IST
  •  फाइजर कंपनी कोरोना से बचाव के लिए दवा लांच करने जा रही है. फाइजर द्वारा तैयार किए गए  एंटी वायरल गोली से अस्पताल में भर्ती होने और मरने कीसंभावना 90 प्रतिशत तक कम हो जाता है. इसके साथ ही अमेरिकी दवा कंपनी मर्क और रिजबैक बायोथेरापैक्टिस ने करोना से बचाव के लिए मोलनूपुरावीर नाम से दवा विकसित की है. जिसे ब्रिटेन ने मंजूरी भी दे दी है.
कोरोना वायरस की इलाज के लिए फाइजर कंपनी ने तैयार किया टैबलेट.(प्रतिकात्माक फोटो)

लखनऊ. इन्जेक्शन लेने से डरने वालों के लिए अच्छी खबर है. कोरोना की सफल टीका बनाने के बाद अब फाइजर कंपनी कोरोना से बचाव के लिए दवा लांच करने जा रही है. फाइजर ने शुक्रवार को जानकारी दी कि उसकी एंटी वायरल गोली से अस्पताल में भर्ती होने और मरने की चांस 90 प्रतिशत तक कम हो जाता है. उधर अमेरिका की दवा कंपनी मर्क और रिजबैक बायोथेरापैक्टिस ने भी कोरोना महामारी से मोलनूपुरावीर नाम से दवा विकसित की है. मोलनूपुरावीर दवा का इस्तेमाल कर कोरोना मरीजों को ठीक किया जा सकता है. इसके इस्तेमाल से कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत की खतरे को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. 

अमेरिका दवा कंपनी मर्क और रिजबैक बायोथेरापैक्टिस द्वारा तैयार की गई मोलनूपुरावीर दवा को ब्रिटेन ने मंजूरी भी दे दी है. इसके साथ ही ब्रिटेन कोरोना की दवा को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है. मोलनूपुरावीर दवा का इस्तेमाल कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखने या फिर कोरोना संक्रमित होने के पांच दिनों में इस्तेमाल किया जा सकता है. मोलनूपुरावीर दवा का इस्तेमाल करोना मरीजों की मौत के खतरों को आधा कर देती है. 

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वहीं फाइजर कंपनी ने कोरोना से बचाव के लिए तैयार किए गए टैबलेट के परीक्षण का डाटा जारी किया है. कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार टैबलेट का 775 वयस्कों पर परीक्षण किया गया हैं. फाइजर कंपनी ने दावा किया है कि इसके इस्तेमाल के बाद कोरोना मरीजों की अस्पताल में भर्ती होने या एक महीने के बाद 89 फीसदी से कम मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आई. इतना ही नहीं किसी मरीज की मौत भी नहीं हुई. 

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फाइजर के मुख्य विज्ञानिक अधिकारी डॉ मिकेल डोलस्टन ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा था कि कंपनी द्वारा तैयार किए गए टैबलेट के परीक्षण में शामिल सभी लोगों ने कोरोना से बचने के लिए किसी तरह का टीका नहीं लगा था. और परीक्षण में शमिल हुए लोग मोटापे, मधुमेह या ह्रदय रोग जैसी समस्यों से ग्रसित थे. इसके बावजूद कोई इस दवा का कोई बड़ा दुष्प्रभाव नजर नहीं आया. सिर्फ 20 प्रतिशत लोगों में मामूली दुष्प्रभाव दिखे. 

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