प्रियंका गांधी के खिलाफ लखीमपुर खीरी में पोस्टर- खून से भरा है दामन तुम्हारा…

Srishti Kunj, Last updated: Tue, 12th Oct 2021, 12:47 PM IST
  • प्रियंका गांधी लखीमपुर खीरी दौरे के लिए लखनऊ से निकली हैं. वहीं उनके खिलाफ इलाके में होर्डिंग लगे हैं. इन पोस्टर पर लिखा है कि फर्जी सहानुभूति नहीं चाहिए. इन पोस्टर को दसमेश सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष सतपाल सिंह मीत के नाम से लगाया लगा है. वहीं कुछ पोस्टर सरदार परमिंदर सिंह के नाम से हैं. 
नहीं चाहिए फर्जी सहानुभूति, खून से भरा है दामन तुम्हारा, तुम क्या दोगे साथ हमारा, नहीं चाहिए साथ तुम्हारा

लखनऊ. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए किसानों की अंतिम अरदास में शामिल होने के लिए निकल गई हैं. इससे पहले भी वो लखीमपुर खीरी हिंसा के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों से मिलने की कोशिश कर चुकी हैं. हालांकि उन्हें लखीमपुर पहुंचने से पहले ही रोक लिया गया था. वहीं अब लखीमपुर खीरी में भी उनके खिलाफ पोस्टर देखने को मिल रहे हैं. लखीमपुर खीरी और सीतापुर में प्रियंका गांधी के खिलाफ पोस्टर लगाए गए हैं जिनपर लिखा है ‘फर्जी सहानुभूति नहीं चाहिए.’ इस तरह के कई पोस्टर देखने को मिले जिनपर 1984 में हुए सिख दंगों से जोड़कर प्रियंका गांधी के खिलाफ लिखा गया. 

इनमें से एक पोस्टर पर लिखा है नहीं चाहिए फर्जी सहानुभूति, खून से भरा है दामन तुम्हारा, तुम क्या दोगे साथ हमारा, नहीं चाहिए साथ तुम्हारा. वहीं दूसरे पोस्टर पर लिखा है नहीं चाहिए फर्जी सहानुभूति, 1984 में सिखों के नर संहार के जिम्मेदार आज सिखों के जख्मों में नमक न डालें. कुल चार तरह के पोस्टर देखने को मिले हैं. इनमें से एक पर लिखा है जिन लोगों ने 1984 का कत्लेआम किया उनका साथ नहीं चाहिए. हम न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं दंगाईयों का साथ नहीं चाहिए. वहीं एक पोस्टर पर लिखा है 1984 दंगों के जिम्मेदारों से लखीमपुर के किसानों को सहानुभूति नहीं चाहिए.

जिन लोगों ने 1984 का कत्लेआम किया उनका साथ नहीं चाहिए. हम न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं दंगाईयों का साथ नहीं चाहिए.

इन पोस्टर में से कुछ पर दसमेश सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष सतपाल सिंह मीत का नाम और कुछ पर सरदार परमिंदर सिंह का नाम लिखा है. ये पोस्टर भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक समाज की ओर से लगाए गए हैं. बता दें कि लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में 3 अक्टूबर को हिंसा में चार किसान मारे गए थे. हिंसा में किसानों के अलावा अन्य 4 लोगों की भी मौत हुई थी.

1984 दंगों के जिम्मेदारों से लखीमपुर के किसानों को सहानुभूति नहीं चाहिए.

इस घटना के बाद प्रियंका गांधी ने पीड़ितों के परिवार से मिलने की कोशिश की और लखीमपुर जानें के लिए निकली थीं. हालांकि उस समय प्रशासन ने माहौल गर्म होते देख प्रियंका को हिरासत में लिया गया था. प्रियंका को निजी मुचलके पर रिहा किया गया था. प्रियंका अब भी लखीमपुर खीरी जानें की जिद्द पर हैं और इसके लिए आज वो फिर कोशिश कर रही हैं.

नहीं चाहिए फर्जी सहानुभूति, 1984 में सिखों के नर संहार के जिम्मेदार आज सिखों के जख्मों में नमक न डालें.
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