एक दिसंबर से बढ़ जाएंगे माचिस के दाम, 14 साल बाद होगी बढ़ोत्तरी

Anurag Gupta1, Last updated: Mon, 25th Oct 2021, 11:48 AM IST
  • 1 दिसंबर से बढ़ जाएंगे माचिस के दाम. पिछले 14 साल से बढ़ती मंहगाई के बीच भी माचिस के दाम नहीं बढ़े थे. तमिलनाडु के शिवकाशी में "ऑल इंडिया चैंबर ऑफ मैच इंडस्ट्री" की बैठक में माचिस के दाम बढ़ाने का फैसला किया गया है. बैठक में माचिस के दाम बढ़ने की वजह कच्चे माल की बढ़ती कीमत को बताया.
माचिस का डिब्बा (प्रतीकात्मक फोटो)

लखनऊ. लंबे समय से महंगाई को धता बताते हुए माचिस उद्योग ने अपना दाम नहीं बढ़ाया था. लेकिन 14 साल बाद माचिस के दाम बढ़ने जा रहे हैं. एक दिसंबर से 1 रूपए में मिलने वाली माचिस 2 रूपए में मिलेगी. अंतिम बार माचिस की कीमत 2007 में बढ़ी थी. उस वक्त 50 पैसे से बढ़ाकर 1 रूपए की गई थी. ये फैसला तमिलनाडु के शिवकाशी में "ऑल इंडिया चैंबर ऑफ मैच इंडस्ट्री" की बैठक में लिया गया है.

गुरुवार को शिवकाशी में ऑल इंडिया चैंबर ऑफ मैच इंडस्ट्री की बैठक में पांच प्रमुख माचिस उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों ने सभी की आम सहमति से 1 दिसंबर से माचिस का दाम 1 रुपये से बढ़ाकर 2 रुपये करने का फैसला किया है. बैठक में दाम बढ़ाने की वजह कच्चे माल की कीमतों में हाल ही में हुई वृद्धि को बताया है.

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डीजल के दाम की वजह से बढ़ रहे माचिस के दाम:

निर्माताओं ने दाम बढ़ाने की वजह बताते हुए माचिस बनाने में लागत का जिक्र किया. बताया कि माचिस बनाने के लिए 14 कच्चे माल की जरूरत होती है. एक किलोग्राम लाल फास्फोरस 425 रुपये से बढ़कर 810 रुपये हो गया है. मोम 58 रुपये से 80 रुपये, बाहरी बॉक्स बोर्ड 36 रुपये से 55 रुपये और भीतरी बॉक्स बोर्ड 32 रुपये से 58 रुपये का हो गया है. कागज, स्प्लिंट्स, पोटेशियम क्लोरेट और सल्फर की कीमत में भी 10 अक्टूबर से वृद्धि हुई है. डीजल की बढ़ती कीमत ने भी और बोझ डाला है.

बिक्री मूल्य में 60 प्रतिशत की बढ़त्तरी:

सचिव वीएस सेथुरथिनम (नैशनल स्मॉल मैचबॉक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन) ने टीओआई को बताया कि निर्माता 600 माचिस (प्रत्येक बॉक्स में माचिस की 50 तीलियां) का एक बंडल 270 रुपये से लेकर 300 रुपये तक में बेच रहे हैं. हमने अपनी इकाइयों से बिक्री मूल्य 60% बढ़ाकर 430-480 रुपये प्रति बंडल करने का फैसला किया है. इसमें 12% जीएसटी और परिवहन की लागत शामिल नहीं है.

कम भुगतान की वजह से लोग मनरेगा में कर रहे काम:

तमिलनाडु में माचिस उद्योग से करीब चार लाख लोग जुड़े हैं. जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं. उद्योग कर्मचारियों को बेहतर भुगतान करके एक अधिक स्थिर कार्यबल को आकर्षित करने की उम्मीद कर रहा है. कम भुगतान की वजह से कई लोग मनरेगा के तहत काम करने में रूचि दिखा रहे हैं क्योंकि वहां भुगतान अच्छा है.

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