140 दिनों तक जिंदगी से जंग लड़कर हार गईं डॉ. सुमन, समय से डोनर नहीं मिलने से निधन

Swati Gautam, Last updated: Tue, 7th Sep 2021, 8:07 PM IST
  • लोहिया संस्थान की रेजिडेंट डॉ. शारदा सुमन को डोनर नहीं मिलने दिल्ली से फेफड़े का प्रत्यारोपण नहीं हो सका. वह जिंदगी के लिए करीब 140 दिन तक वेंटिलेटर पर मौत से जूझती रहीं. मुख्यमंत्री योगी इलाज के लिए डेढ़ करोड़ रुपए भी दिए थे.
140 दिनों तक जिंदगी से जंग लड़कर हार गईं डॉ सुमन, समय से डोनर नहीं मिलने से निधन (फाइल फोटो)

लखनऊ. लोहिया संस्थान की रेजिडेंट डॉ शारदा सुमन का फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए कोई डोनर नहीं मिलने पर सोमवार को अस्पताल में निधन हो गया. 7 महीने की दूध पीती बच्ची के सिर से मां ला सांया भी उठ गया. दरअसल डॉ सुमन का फेफड़ा खराब हो गया था. जिसके बाद उन्हें लोहिया संस्थान के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अत्यधिक फेफड़ों में संक्रमण हो जाने से डॉक्टर ने फेफड़ा प्रत्यारोपण की सलाह दी थी. फिर हैदराबाद फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए भेजा गया. 140 दिनों तक वह वेंटीलेटर पर मौत से संघर्ष करने के बाद डॉ सुमन का 4 सितंबर को हैदराबाद में निधन हो गया. डॉक्टर ने बताया कि उन्हें कोई डोनर नहीं मिला. 

डॉ सुमन के पति डॉ अजय भी लोहिया संस्थान के मेडिसिन विभाग में चिकित्सक है. उन दोनों का विवाह मई 2019 में हुए. डॉ अजय मूल रूप से खलीलाबाद नामक स्थान का निवासी है. गर्भावस्था में दौरान डॉ सुमन ने कोरोना की दूसरी लहर में भी अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ी थी. ड्यूटी के दौरान वह कोविड की चपेट में आ गई थी. जहां उनके दोनों फेफड़े खराब हो गए. 14 अप्रैल को उन्हें लोहिया संस्थान के कोविड-19 ताल में भर्ती कराया गया था उस दौरान वह 7 माह की गर्भवती भी थी. जिसके बाद उनकी प्रीमेच्योर डिलीवरी करानी पड़ी कॉविड से अत्यधिक संक्रमण हो जाने से डॉक्टर ने फेफड़ा प्रत्यारोपण की सलाह दी. इसमें एक करोड़ रुपये से अधिक का खर्च अनुमानित किया था. जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी इलाज के लिए डेढ़ करोड़ रुपए दिए थे.

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11 जुलाई को डॉ सुमन को लोहिया संस्थान से एअरलिफ्ट कराकर हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए भर्ती कराया गया था. इससे पहले वह करीब चार   महीने तक एक एकमो मशीन पर जीवित रही. एकमो पर जीवन के लिए संघर्ष कर रही सुमन ने एक बच्ची को जन्म दिया था. जिसके बाद उनके दोनों फेफड़े भी खराब हो गए. काफी इंतजार के बाद भी डोनर ना मिलने की वजह से निधन हो गया अब दूधमुही बेटी बिन मां के रह गई है.

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