विदेशों के तर्ज पर अब उतर प्रदेश में भी प्लास्टिक वेस्ट मटेरियल से बनेगी सड़क

Smart News Team, Last updated: 02/12/2020 05:19 PM IST
  • उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है लोक निर्माण विभाग वेस्ट प्लास्टिक से 1500 किलोमीटर सड़कें बनवाएगा. इसमें करीब 2000 टन वेस्ट प्लास्टिक की खपत होगी, जो पर्यावरण संरक्षण में बहुत सहायक होगा. उन्होंने कहा कि नई तकनीकी के उपयोग से करीब 16 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है.
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लखनऊ: विदेशों की तकनीकी के तर्ज पर उतर प्रदेश में भी अब प्लास्टिक वेस्ट मटेरियल से सड़क बनाने कि पहल हो रही है. इसी क्रम में नोएडा में ट्रायल के लिए 500 मीटर लंबी सड़क बनाई गई है. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है लोक निर्माण विभाग वेस्ट प्लास्टिक से 1500 किलोमीटर सड़कें बनवाएगा. इसमें करीब 2000 टन वेस्ट प्लास्टिक की खपत होगी, जो पर्यावरण संरक्षण में बहुत सहायक होगा. उन्होंने कहा कि नई तकनीकी के उपयोग से करीब 16 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है. वातावरण के प्रदूषणमुक्त करने व बीमारियों से बचाव के लिए लोक निर्माण विभाग ने 175 हर्बल मार्गों का चयन कर ग्रीन पट्टी बनाकर हर्बल वृक्ष लगाए हैं. इसमें नीम, आंवला अर्जुन, सहजन, पीपल आदि पौधे लगाए गए. हर्बल मार्गों पर अब तक 32731 पौधे लगाए जा चुके हैं.

उन्होंने बताया कि इसी प्रकार लोक निर्माण विभाग द्वारा हर्बल वाटिका का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें मासपर्णी, सप्तपर्णी, जत्रोफा (रतनजोत), मेंथा, लेमन ग्रास, भ्रिंगराज, मुई, बाह्मी, तुलसी, अनन्तमूल, ग्वारापाठा, अश्वगंधा, हल्दी आदि पौधे जोकि कई रोगों के समाधान के लिए अत्यन्त उपयोगी पौधे लगाए जा रहे हैं. मार्गों को हर्बल मार्ग व हर्बल वाटिका बनाने का मुख्य उद्देश्य लोगो की इम्यूनिटी को बेहतर करने के साथ साथ पर्यावरण को शुद्ध रखना है.

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भारत पेट्रोलियम का दावा है कि पूरे भारत में प्लास्टिक वेस्ट मॉड्यूल का प्रयोग कर सड़क बनाने का कार्य पहली बार नोएडा में किया जा रहा है. इससे वायु प्रदूषण में कमी का दावा किया जा रहा है.

जीएम राजीव त्यागी ने बताया कि यह सड़क 45 मीटर चौड़ी है. 500 मीटर लंबाई और 12 मीटर चौड़ाई में सड़क निर्माण कराया गया है. भारत पेट्रोलियम की ओर से उपलब्ध 450 गुना 450 एमएम साइज के प्लास्टिक कचरे के मॉड्यूल शीट को सड़क की सतह पर बिछाकर इसके ऊपर 40 व 50 एमएम साइज की दो लेयर बिटुमिन कंक्रीट की बिछाई जाएगी.

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500 मीटर लंबाई की सड़क पर करीब 35 मिट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का उपयोग होगा. हालांकि, प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण कई जगहों पर हो चुका है. अधिकारियों का कहना है कि अगर यह मॉड्यूल सफल होता है तो इसे अन्य सड़कों के निर्माण में उपयोग किया जाएगा. इसकी बराबर निगरानी की जाएगी.

 

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