दिव्यांग डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का ट्रांसफर रोके सरकार : हाई कोर्ट

Smart News Team, Last updated: Thu, 21st Jan 2021, 11:56 AM IST
  • दिव्यांग कोटे से चयनित डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर एलके मिश्रा की याचिका पर हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद दिया फैसला, सरकार से कहा कि दिव्यांग अधिकारी एलके मिश्रा को उनके पद पर काम करने की छूट दी जाए।
हाई कोर्ट लखनऊ बेंच

 लखनऊ : डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर एलके मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उनके स्थानांतरण को नियम विरुद्ध बताकर सरकार को उनका ट्रांसफर रोकने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट के जस्टिस सीडी सिंह की बेंच ने यह आदेश सुनाया है। साथ ही टिप्पणी की है कि  यदि सरकार कोई ट्रांसफर नीति बनाती है तो यह माना जाता है कि उस पर अमल होगा और ऐसी नीति किसी अधिकारी की मनमर्जी से नकारी नहीं जा सकती है, जब तक उसमें नियमानुसार संशोधन न किया जाए।

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दरअसल याची की ओर से कहा गया कि उसका चयन एआरटीओ के पद पर 1987 में यूपीएससी से दिव्यांग कोटे के तहत हुआ था। बाद में उसका प्रमोशन आरटीओ और अब डिप्टी टीसी के पद पर हुआ। कहा गया कि याची का ट्रांसफर 27 जून 2019 को लखनऊ जोन से वाराणसी जोन किया गया, जहां उसका काम अच्छा आंका गया। एक साल के भीतर ही उन्हें फिर 11 जून 2020 को वाराणसी जोन से लखनऊ जोन ट्रांसफर करने का आदेश प्रमुख सचिव, परिवहन ने जारी कर दिया, जो मनमाना और गलत है। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने 15 दिसंबर 2003 को स्थानांतरण नीति बनाई, जिसके तहत तय किया गया कि दिव्यांगजनों का स्थानांतरण रूटीन में नहीं किया जाएगा। इसमें यह तर्क दिया गया कि याची को रूटीन ट्रांसफर करके परेशान किया जा रहा है। याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि याची का स्थानांतरण सरकारी कार्य के हित में बेहतर प्रशासन के लिए किया गया है और इसमें कुछ गलत नहीं है। जस्टिस सिंह ने सभी पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद कहा कि जब स्थानांतरण नीति 15 दिसंबर 2003 को बनी हे तो उसका उल्लंघन नहीं करने दिया जा सकता है।

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