Run for Ram: अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव रामेश्वरम से दौड़ कर पहुंचे अयोध्या

Sumit Rajak, Last updated: Sat, 27th Nov 2021, 9:35 AM IST
  • माउंटेन रिंग में वर्ल्डकिंग की उपाधि हासिल करने के अलावा पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटी फतह कर डेढ़ दर्जन विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव ने एक और कीर्तिमान बनाया है. उन्होंने ‘रन फॉर राम’ के लिए रामेश्वरम से अयोध्या तक दौड़ लगाकर 47 दिनों में 2931 किलोमीटर की दूरी अपने पैरों से नाप ली. राम जन्मभूमि ट्रस्ट को सभी रिकॉर्ड समर्पित करेंगे. ट्रस्ट महासचिव ने कहा कि इन्होंने अपना अनोखा परिश्रम रामलला को समर्पित किया
प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ. माउंटेन रिंग में वर्ल्डकिंग की उपाधि हासिल करने के अलावा पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटी फतह कर डेढ़ दर्जन विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव ने एक और कीर्तिमान बनाया है. उन्होंने ‘रन फॉर राम’ के लिए रामेश्वरम से अयोध्या तक दौड़ लगाकर 47 दिनों में 2931 किलोमीटर की दूरी अपने पैरों से नाप ली. 7 राज्यों की सीमाओं का स्पर्श करते हुए अयोध्या पहुंचे.

कारसेवकपुरम में शुक्रवार को राम जन्मभूमि ट्रस्ट महासचिव चंपत राय से भेंट की. ट्रस्ट महासचिव ने रिकॉर्ड धारी खिलाड़ी को सम्मानित किया. ट्रस्ट महासचिव ने कहा कि इन्होंने अपना अनोखा परिश्रम रामलला को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी के रूप में इन्होंने इस दौड़ के माध्यम से देश की क एकात्मकता के स्वरूप का दर्शन किया है जो यह संदेश देने के लिए काफी है कि भाषा के आधार पर कही झगड़ा नहीं है. उन्होंने कहा सिनेमा, पर्यटन व क्रिकेट भी इसका परिणाम है.

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राम जन्मभूमि ट्रस्ट को समर्पित करेंगे सभी रिकॉर्ड

अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही नरेंद्र ने बताया कि उन्होंने रन फार राम के विश्व रिकॉर्ड के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से लेकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड सहित दर्जनभर संस्थाओं में पंजीकरण के बाद दौड़ शुरू की थी. उन संस्थाओं की ओर से प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद उसे राम जन्म भूमि ट्रस्ट को सौंप देंगे. उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशवासियों ही नहीं विदेश में बसे राम भक्तों ने निधि समर्पित की है. उन्होंने कहा कि जब युवा अभियान चल रहा था तभी उनके मन में कुछ हटकर रामलला को समर्पित करने का विचार आया था. उसी विचार की परिणित हुई अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही नरेंद्र गुड़गांव हरियाणा के निवासी हैं. उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि भाषा की जानकारी न होने पर भी दक्षिण में परिवार के सदस्य रूप में वहां के लोग ने जो प्यार और अपनापन दर्शाया, वह बताता है कि भगवान के लिए उनमें आगाध श्रध्दा है.

 

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