ओवैसी को झटका, यूपी BJP अध्यक्ष से मिले राजभर, 2022 में फिर गठबंधन की ये शर्त

Smart News Team, Last updated: Tue, 3rd Aug 2021, 4:05 PM IST
  • उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने लखनऊ में मंगलवार को बीजेपी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के आवास पर जाकर मुलाकात की है. इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में हलचल है कि राजभर फिर से बीजेपी के साथ गठबंधन कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है कि ओवैसी के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है.
ओमप्रकाश राजभर ने की यूपी बीजेपी अध्यक्ष से मुलाकात, गठबंधन के लिए रखी ये शर्त

लखनऊ. राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है, इस कथन का ताजा उदाहरण सुहेलदेव समाज पार्टी के मुखिया ओपी राजभर हैं जो पिछले कुछ समय तक योगी सरकार में मंत्री थे लेकिन बाद में मंत्री पद छोड़ एनडीए से नाता तोड़ लिया था. ऐसे में अब यूपी विधानसभा चुनाव से पहले उनकी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या और बीजेपी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात ने सूबे की राजनीति में हलचल मचा दी है. चुनाव से पहले राजभर की एनडीए में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं. अगर ऐसा होता है तो यह हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के लिए बड़ा झटका होगा. पिछले कुछ दिनों से ओवैसी और राजभर ही एक साथ मिलकर प्रदेश यात्रा कर रहे हैं और ऐसे में अगर राजभर अचानक एनडीए में चले गए तो ओवैसी की यूपी में राजनीतिक राह कठिन हो जाएगी. 

गौरतलब है कि मंगलवार को ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से भी उनके आवास पर मुलाकात की. करीब 1 घंटे तक चली बैठक में राजभर के साथ भाजपा नेता दयाशंकर सिंह भी थे. राजभर की इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जाने लगे कि राजभर फिर से एनडीए में शामिल हो सकते हैं. चुनाव से पहले बीजेपी के साथ गठबंधन करने को लेकर ओपी राजभर ने कुछ शर्तें रखी हैं. उनकी मुख्य शर्त है कि अगर चुनाव जीते तो सीएम पिछड़ी जाति का होगा.  

ओपी राजभर बोले- राजनीति में कुछ भी संभव

मुलाकात के बाद राजभर ने कहा कि ये एक शिष्टाचार मुलाकात थी. देश पहले कृषि प्रधान था, अब जाति प्रधान देश है. हम पिछड़ी जाति से आते हैं. वह भी पिछड़ी जाति से आते हैं. इसलिए हम मुलाकात करते रहते हैं. अगर इस मुलाकात के बारे कोई कुछ कहता है तो कहने दो क्योंकि राजनीति में क्या हो रहा इसका भी समय समय पर ज्ञान होना चाहिए. जब ममता बनर्जी और सोनिया गांधी मिल सकती हैं, जब मायावती और अखिलेश मिल सकते हैं, तो राजनीति में कुछ भी संभव है.

राजभर ने बीजेपी के साथ गठबंधन पर कहा कि हमारी पार्टी से हर दल गठबंधन करना चाहता है. हालांकि हमारी गठबंधन के लिए पांच शर्ते हैं जिसमें एक शर्त ये मुख्य ये है कि चुनाव जीतने पर पिछड़ी जाति का नेता ही मुख्यमंत्री होगा. क्योंकि प्रदेश में 52 फीसदी पिछड़ी आबादी है और इसलिए अब ये नहीं होगा कि वोट हमारा और राज तुम्हारा. अब ये होगा कि वोट हमारा होगा और राज भी हमारा होगा और हम 2022 करके दिखाएंगे. अगर बीजेपी हमारी शर्तों को मानती है तो हम इस पर विचार करेंगे.

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बता दें सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में 2017 का यूपी विधानसभा चुनाव लड़ा था और भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बने थे. हालांकि बाद में ये बागी हो गए और उन्हें सरकार से बाहर कर दिया गया. कुछ दिन पहले ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से भी मुलाकात की है और वह लगातार पीएसपीएल प्रमुख शिवपाल सिंह यादव के संपर्क में हैं. वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से भी उनकी मुलाकात हुई है. हाल ही में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह से भी राजभर मिले थे.

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