सुप्रीम कोर्ट का आदेश- जेल में बंद बुजुर्ग कैदियों की रिहाई पर विचार करे यूपी सरकार

Haimendra Singh, Last updated: Sun, 27th Feb 2022, 11:28 AM IST
  • शीर्ष अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के जेलों में कैदियों की भरमार और उनकी सुनवाई न होने को देखते हुए यूपी सरकार को इनकी रिहाई पर विचार करने का आदेश दिया है. इस उन कैदियों को लाभ मिल सकता है जिनकी 14 वर्ष की सजा पूरी हो चुकी है या जिन कैदियों की आयु 60 वर्ष से अधिक है.
सुप्रीम कोर्ट.( फाइल फोटो )

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को लिए अच्छी खबर है. राज्य की जेलों में सजा काट रहे कैदियों को 14 वर्ष की सजा पूरी होने या 60 साल अधिक की आयु होने पर सुप्रीम कोर्ट(Supreme court) ने यूपी सरकार को आदेश दिया है. अदालत ने कहा है कि कैदियों की भरमार और उनकी सुनवाई न होते देख सरकार को इनकी रिहाई पर विचार करना चाहिए. शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह 14 वर्ष की सजा पूरी कर चुके और बुजुर्ग कैदियों की सूची तैयार कराया जाए. 

यूपी के जिलों में 7000 से अधिक ऐसे कैदी हैं जो 10 साल से ज्यादा की सजा काट चुके हैं. अदालत ने कहा है कि सरकार को दंड विराम (धारा 433 ए के तहत) कमेटी बनाकर इस तरीके के मामलों को स्वतः विचार कर ले. कोर्ट ने यह निर्देश स्वतः संज्ञान पर लिए गए मामले पर दिया है. हाल में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक मामला सामने आया था जिसमें हाईकोर्ट ने ऐसे मामले में जमानत पर सुनवाई से इनकार करने से इंकार कर दिया था. शीर्ष अदालत की रिहाई का फैसला उन लोगों को खुशखबरी हो सकता है कि जो पिछले 10-12 सालों से राज्यों की विभिन्न जेलों में बंद है या जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो गई है.

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यूपी सरकार को समिति बनाने के निर्देश

कोर्ट ने कहा है कि इस तरीके के मामलों में जेल प्रशासन की भूमिका अहम है क्योंकि, जेलर को पता होता है कि किस कैदी ने कितनी सजा काट ली है या उसकी उम्र 60 या उससे ज्यादा है या नहीं. इसी का ध्यान रखते हुए शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह 14 वर्ष की सजा पूरी कर चुके और बुजुर्ग कैदियों की सूची तैयार कराई जाए. साथ ही जल्द से जल्द कैदी की रिहाई के लिए मामले को राज्य प्रिजन रिलीज कमेटी को भेजा जाए.

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