CAA Protest: सुप्रीम कोर्ट की फटकार, यूपी सरकार वसूली नोटिस वापस ले, नहीं तो रद्द कर देंगे

Smart News Team, Last updated: Fri, 11th Feb 2022, 10:49 PM IST
  • सुप्रीम कोर्ट ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को मिले यूपी सरकार के वसूली नोटिसों को 18 फरवरी तक वापस लेने के लिए कहा है. साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उत्तर प्रदेश सरकार ऐसा नहीं करती है तो हम खुद इन नोटिसों को कानूनी रूप से रद्द कर देंगे.
फोटो- सुप्रीम कोर्ट

लखनऊ. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए वसूली नोटिस जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को वसूली नोटिस वापस लेने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को आखिरी मौका दिया और साथ ही चेतावनी देते हुए कि कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह उन्हें कानूनी रूप से रद्द कर देगा.

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने नोटिस वापस लेने की कार्यवाही नहीं करने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि नोटिस वापस नहीं लिए गए, तो उन्हें रद्द कर दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिसंबर 2019 में शुरू की गई कार्यवाही शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत थी.

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कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार नोटिस वापस ले लें या हम इस अदालत द्वारा निर्धारित कानून का उल्लंघन करने के लिए इसे रद्द कर देंगे. राज्य सरकार को कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा कि कृपया इसकी जांच करें, हम 18 फरवरी तक एक अवसर दे रहे हैं.

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2019 नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक संपत्तियों को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए वसूली के वास्ते नोटिस जारी किए गए थे. कोर्ट ने राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील से कहा कि सरकार ने आरोपी की संपत्तियों को कुर्क करते समय एक शिकायतकर्ता, निर्णायक और अभियोजक की तरह काम किया है.

वहीं यूपी सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने सुनवाई के दौरान कहा कि आठ सौ से अधिक दंगाइयों के खिलाफ 100 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गईं, उनके खिलाफ 274 वसूली नोटिस जारी किए गए थे. उन्होंने कहा कि 236 में वसूली आदेश पारित किए गए, जबकि 38 मामलों को बंद कर दिया गया.

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