बोर्ड परीक्षाएं ऑफलाइन नहीं कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Sumit Rajak, Last updated: Tue, 22nd Feb 2022, 5:57 AM IST
  • सुप्रीम कोर्ट ऑफलाइन एग्जाम के लिए परीक्षार्थियों को ऑफलाइन मोड के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा. उच्चतम न्यायालय याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी है. याचिका में सीबीएसई और अन्य बोर्ड की ओर से इस वर्ष ऑफलाइन माध्यम से 10वीं और 12वीं कक्षा बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं कराने का अनुरोध किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

लखनऊ. आईसीएसई और सीबीएसई द्वारा प्रस्तावित 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा अप्रैल 2022  में शुरू हो रहे हैं. बोर्ड्स द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, ये परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में होनी हैं. लेकिन छात्रों ने ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं. आईसीएसई सीबीएसई ऑफलाइन परीक्षा कैंसिल करने को लेकर सुप्रीम कोर्टमें याचिका भी लगाई गई है. शीर्ष अदालत सोमवार को बोर्ड की प्रस्तावित ऑफलाइन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग संबंधी याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए सहमत हो गई. याचिका में कहा गया है कि गत वर्ष की तरह इस बार भी वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति से ही परीक्षा परिणाम घोषित किए जाने चाहिए.

मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने संबंधित याचिका को न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है. याचिका में सीबीएसई, आईसीएसई और एनआईओएस समेत सभी राज्यों में 10वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाएं ऑफलाइन माध्यम से आयोजित कराने पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई है. 

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याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की गई हैं, जिसके कारण ऑफलाइन परीक्षा आयोजित कराना सही नहीं है. ऑफलाइन परीक्षाएं आयोजित करने से छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और वह अपने परिणाम को लेकर बेहद तनाव में आ सकते हैं.

याचिकाकर्ता अनुभा श्रीवास्तव सहाय ने  बताया कि कई छात्र ऑफलाइन परीक्षाएं कराने के फैसले से दुखी हैं. साथ ही कहा कि ऑफलाइन परीक्षा को रद्द करके वैकल्पिक यानी गत वर्ष की तरह छात्रों के पिछले शैक्षणिक परिणाम और आंतरिक मूल्यांकन पद्धति को ही अपनाया जाना चाहिए. इसके साथ ही याचिका में आंतरिक मूल्यांकन से असंतुष्ट छात्रों को अपने परिणाम में सुधार का एक और मौका दिए जाने का भी अनुरोध किया गया है.

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