कोरोना वैक्सीन के लिए पैसे देने को तैयार 44 % ग्रामीण,51 % ने बताया चीन की साजिश

Smart News Team, Last updated: Tue, 22nd Dec 2020, 10:44 PM IST
  • देश के 16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में सर्वे में 41 फीसदी ग्रामीण भारतीयों ने माना है कि वह कोरोना वैक्सीन के लिए भगतान करने को तैयार हैं. वहीं 51 फीसदी ग्रामीण भारतीयों ने कोरोमा महामारी को चीन की साजिश बताया है.
51 फीसदी ग्रामीण भारतीयों ने कोरोना बीमारी को चीन की साजिश बताया

16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए सर्वे में लगभग आधे ग्रामीण भारतीयों ने कहा है कि वे कोरोना वैक्सीन के लिए भुगतान करने को तैयार हैं, जबकि 36 प्रतिशत ने कहा कि वे इसके लिए भुगतान नहीं करना चाहेंगे. जो लोग भुगतान करने को तैयार हैं, उनमें से दो-तिहाई ने कहा कि वे वैक्सीन की दो खुराक के लिए वे 500 रुपये तक का भुगतान कर सकते हैं. 51 प्रतिशत लोगों ने कोरोना बीमारी को चीन की साजिश बताया, जबकि 18 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कोरोना का प्रसार सरकार की असफलता है.

भारत के सबसे बड़े ग्रामीण मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘गाँव कनेक्शन’ के डेटा और इनसाइट्स विंग ‘गाँव कनेक्शन इनसाइट्स’ द्वारा कोरोना और कोरोना वैक्सीन को लेकर आम ग्रामीण भारतीयों की क्या धारणा है, इसको लेकर एक सर्वे कराया गया. यह भारत में इस तरह का पहला सर्वे है. पूरी सर्वे रिपोर्ट को ‘The Rural Report 3: COVID-19 Vaccine and Rural India’ के रूप में जारी किया गया है, जो www.ruraldata.in पर मुफ्त उपलब्ध है.

एक दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच किया गया यह फेस-टू-फेस सर्वे 16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 60 जिलों के 6,040 ग्रामीण उत्तरदाताओं के बीच किया गया. इन राज्यों का चयन, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी कोरोना आंकड़ों के अनुसार किया गया, जिसमें उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक कोरोना से सबसे अधिक और सबसे कम प्रभावित राज्य शामिल हैं. इस सर्वे में संभावित त्रुटि यानी मार्जिन ऑफ एरर की संभावना 5 प्रतिशत है.

उत्तरी क्षेत्र से जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड राज्य शामिल किए गए. वहीं दक्षिणी क्षेत्र से कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश शामिल हुए. पश्चिमी राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश को शामिल किया गया, जबकि पूर्वी व पूर्वोत्तर राज्यों में असम, अरूणाचल प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल इस राष्ट्रव्यापी सर्वे में शामिल हुए.

कुल 6040 उत्तरदाताओं में चार में से एक व्यक्ति ने कहा कि उनके घर में कम से कम एक सदस्य का कोविड जांच हुआ. ऐसे घरों का अनुपात पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में सबसे अधिक (42.6%) और उत्तरी राज्यों (10.9%) में सबसे कम रहा.

जिन 25.9 प्रतिशत परिवारों ने अपने परिवार के सदस्यों का कोरोना टेस्ट करवाया, उनमें से आधे से अधिक यानी 59 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उनके घर में कम से कम एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित निकला. कुल मिलाकर 6,040 उत्तरदाता परिवारों में से 15 प्रतिशत लोगों ने अपने घर, रिश्तेदार, पड़ोसी, दोस्तों या जानने वालों में से कम से कम एक व्यक्ति के कोविड-19 पॉजिटिव होने की बात स्वीकार की.

दक्षिणी राज्यों में प्रत्येक चार घरों में से तीन (75.9%) घरों में कोई ना कोई कोविड संक्रमित मिला, जो कि देश में सर्वाधिक है. इसके विपरीत, यह उत्तरी राज्यों में सबसे कम था जहां केवल 12 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में कम से कम एक सदस्य कोविड पॉजिटिव पाया गया.

ग्रामीणों से यह भी पूछा गया कि अगर उन्हें कोरोना वैक्सीन के लिए पैसे लगाने होंगे, तो वे अपने घर में किसे सबसे पहले टीका लगवाएंगे. इसके जवाब में उन्होंने घर के बूढ़े-बुजुर्ग लोगों को चुना, जिनका प्रतिशत सर्वाधिक 33.3% था. इसके अलावा 26.5 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अपने बच्चों को सबसे पहले टीका लगवाएंगे, जबकि 16% लोगों ने कहा कि घर का जो मुख्य कमाने वाला है, उसे पहले टीका लगना चाहिए.

लखनऊ: भाड़े के शूटरों से कराई गई व्यापार मण्डल के अध्यक्ष की हत्या

कोविड वैक्सीन लगाने में किसको प्राथमिकता मिलना चाहिए, इस सवाल के जवाब में अधिकांश ग्रामीण परिवारों (43.5%) लोगों ने डॉक्टरों और नर्सों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया. वहीं इसके बाद उन्होंने आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं (34.8%), सफाई कर्मचारियों (34.7%) और पुलिस कर्मियों (31.4%) को प्राथमिकता देने की बात कही.

गांव कनेक्शन ने अपने सर्वे में यह भी पाया गया कि कोरोना की वजह से लोगों ने अपने खाने की आदतों में बदलाव किया है. लगभग 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने बाहर का खाना खाना बंद कर दिया है, इनमें से 54 प्रतिशत ऐसे लोग हैं, जो मांसाहार का सेवन करते हैं. 33 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कहा कि उन्होंने अधिक सब्जियां खाना शुरू कर दिया है, जबकि 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे आजकल अधिक फल खा रहे हैं.

यूपी: वर्ष 2021-22 के बजट में गांवों के विकास के लिए आएगी योजना

कई ग्रामीण परिवारों को अभी भी महामारी में भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है. गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यापन करने वाले (बीपीएल कार्ड धारक) लोगों में से हर चार में एक (25%) ने कहा कि कोरोना के कारण आर्थिक तंगी बनी हुई है और उन्हें रोज के खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है.

UP: 13 शहरों में सस्ते मकान के खरीददार नहीं, परियोजनाओं को निरस्त करने की तैयारी

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें