दो साल से नौकरी के लिए भटक रहे शिक्षक, कहीं पद खाली नहीं तो कहीं स्कूल ही नहीं

Smart News Team, Last updated: Thu, 28th Jan 2021, 10:03 PM IST
  • दो दर्जन शिक्षक ऐसे मौजूद है जो नियुक्ति होने के बाद भी अभी तक अपना कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाएं है. शिक्षकों को अनेक तरह की समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है जैसे कहीं स्कूल का नाम गलत होता है तो कहीं उस नाम का स्कूल ही नहीं होता.
दो साल से नौकरी के लिए भटक रहे शिक्षक, कहीं पद खाली नहीं तो कहीं स्कूल ही नहीं

लखनऊ: आलोक शुक्ला को बहुत मशक्कत करने पर दो साल बाद नौकरी मिली. उन्हे लोक सेवा आयोग से एलटी ग्रेड में संस्कृत विषय के सहायक अध्यापक के पद के लिए चुना गया. 2020 के अक्टूबर महीने में उन्हें नियुक्ति पत्र भी मिल गया, लेकिन जब आलोक नियुक्ति पत्र ले कर अमेठी के राजकीय हाईस्कूल में अपना कार्यभार संभालने पहुंचे तो उन्हें पता चला कि अमेठी में इस नाम का तो कोई स्कूल ही नहीं है.

इस तरह का यह सिर्फ एक मामला नहीं है. वंदना रानी गुप्ता भी देवरिया के जीजीआईसी-सलेमपुर पहुंची तो पता चला कि वह जिस नौकरी के लिए वहां गई थी उसकी जगह खाली है नहीं है. इस स्कूल में जीवविज्ञान की शिक्षिका पहले से साल 2015 से काम कर रही हैं. इसलिए यह पद खाली ही नहीं है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस स्कूल में सात शिक्षकों के पद खाली थे लेकिन सिर्फ जीवविज्ञान, गणित, और अंग्रेज़ी की शिक्षिकाएं ही स्कूल में मौजूद थीं.

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यह सिर्फ आलोक और वंदना के साथ हुआ मामला नहीं है, इनकी तरह लगभग दो दर्जन शिक्षक ऐसे मौजूद है जो नियुक्ति होने के बाद भी अभी तक अपना कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाएं है. शिक्षकों को अनेक तरह की समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है जैसे कहीं स्कूल का नाम गलत होता है तो कहीं उस नाम का स्कूल ही नहीं होता. कहीं एक ही खाली पद के लिए दो शिक्षकों को नियुक्त कर लिया जाता है, नियुक्ति पत्र भी मिल जाता है लेकिन स्कूल पहुंच कर पता चलता है कि पद खाली ही नहीं है.

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अक्तूबर 2020 में 10768 एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में चयनित शिक्षकों को ऑनलाइन नियुक्ति पत्र दिए गए थे. विभाग का दावा था कि तैनाती में विभागीय दखल खत्म किया गया है और सॉफ्टवेयर की मदद से स्कूल आवंटन किया गया है लेकिन अब ये नवनियुक्त शिक्षक भटक रहे हैं और इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है. बिन्देश कुमार पाल, राजेश कुमार मौर्य, सुनील कुमार, सुनीता, संगीता पटेल, सुशील कुमार, अशोक कुमार यादव, शिवेन्द्र तिवारी, राजेश कुमार समेत ऐसे कई अभ्यर्थी हैं जो डीआईओएस से लेकर निदेशालय तक के चक्कर काट चुके हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है.

 

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