पंजाब में बेच गया किशोर चाइल्डलाइन की मदद से हुआ मुक्त, कराई जा रही थी बंधुआ मजदूरी

Prince Sonker, Last updated: Thu, 14th Oct 2021, 5:06 PM IST
  • लखनऊ के महोना गांव के रहने वाले एक किशोर को तीन साल पहले कुछ ड्राइवरों ने नशीला पदार्थ खिलाकर ढाबे से अगवा कर लिया था. उसे पंजाब ले जाकर बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी. चाइल्डलाइन की मदद से किशोर को उसके घर पहुंचाया गया.
(प्रतीकात्मक फोटो)

लखनऊ. महोना गांव के एक किशोर को कुछ लोग नशीला पदार्थ खिलाकर अगवा कर ले गए. इसके बाद उसे पंजाब में बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी. तीन साल पहले अगवा हुए इस किशोर को चाइल्ड लाइन ने मुक्त कराकर उसके परिजनों को सौंप दिया है. चाइल्ड लाइन के कॉर्डिनेटर कृष्ण प्रताप शर्मा ने बताया कि सत्येंद्र इटौंजा के महोना का रहने वाला है. वह तीन साल पहले दोस्तों के साथ खाना खाने गया था. सत्येंद्र के मुताबिक ढ़ाबे पर कुछ ट्रक ड्राइवर साथ चलने के लिए कहने लगे. डर के मारे बाकी बच्चे भाग गए लेकिन वह वहीं रह गया. सत्येंद्र छोटा था इस वजह से वह नहीं भाग पाया.

 

सत्येंद्र ने बताया कि उसे खाने में कुछ दिया गया था जिससे वह बेहोश हो गया. इसके बाद ट्रक ड्राइवर उसे अपने साथ पंजाब ले गए. यहां उसे बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया. यहां उससे सारा काम कराते थे और मना करने पर मारते-पीटते थे. कुछ दिन बाद ट्रक ड्राइवर ने उसे किसी और के हाथ बेंच दिया. वहां उसके जैसे अन्य किशोर और बच्चे थे. उनको रोज सुबह पांच बजे उठा दिया जाता था. उस जगह 150 के लगभग गाय-भैंसें थीं जिनकी देखभाल करनी होती थी. दिन में दो बार दोपहर को 12 बजे और रात में नौ बजे बच्चों को खाना दिया जाता था. रात के समय बच्चों के पैरों में जंजीर बांध दी जाती थी ताकि वह भाग न सके.

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खुश मिजाज होने की वजह से सत्येंद्र को अलग कर पंजाबी सिखाई गई. एक दिन कबड्डी प्रतियोगिता के दिन वह किसी तरह भाग निकला और अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंचा. स्टेशन पर एक सफाईकर्मी से उसकी बात हुई जिसने रेलवे चाइल्डलाइन को सूचना दी. महोना गांव से पुष्टि होने के बाद सत्येंद्र को वापस लाया गया. बुधवार को चाइल्डलाइन टीम के संगीता शर्मा और विजय पाठक सत्येंद्र से मिलने उसके घर गए. इस पर उसके परिजनों ने चाइल्डलाइन का आभार जताया.

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