लखनऊ: फर्जी शिक्षा बोर्ड की मार्कशीट पर सालों से कर रहे नौकरी, पकड़े गए 3 शिक्षक

Smart News Team, Last updated: Wed, 30th Sep 2020, 7:21 AM IST
लखनऊ के तीन शिक्षकों को फर्जी शिक्षा बोर्ड हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की मार्कशीट के आधार पर नौकरी करता हुआ पाया गया है. यह तीनों सरकार की सहायता से चलने वाले स्कूल में काम कर रहे थे. इन तीनोे शिक्षकों को नोटिस जारी कर अपनी बात रखने को मौका दिया गया है.
लखनऊ: फर्जी शिक्षा बोर्ड मार्कशीट पर सालों से कर रहे नौकरी, पकड़े गए 3 शिक्षक

लखनऊ. लखनऊ के तीन शिक्षकों को फर्जी शिक्षा बोर्ड की मार्कशीट से नौकरी करने का दोषी पाया गया है. इस मार्कशीट के आधार पर यह सरकारी की सहायता से चलने वाले स्कूल में काम कर रहे थे. ये तीनों अध्यापक फर्जी शिक्षा बोर्ड हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की मार्कशीट के आधार पर नौकरी कर रहे थे.

यह बात जब सामने जब प्रशसन के कहने पर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के स्तर पर दस्तावेजों की जांच की गई. डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल(डीआईओएस) डाॅ. मुकेश कुमार सिंह ने इन तीनों टीचरों की सेवा समाप्ति की कार्रवाई शुरू कर दीं है. इससे पहले इनको नोटिस जारी कर अपनी बात कहने का भी मौका दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा की अगर अपनी बात रखने के लिए तीनों टीचर नहीं होंगे तो यह माना जाएगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना. इसके बाद नौकरी से हटाने की कार्रवाई शुरू होगी.

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लखनऊ मोंटेसरी इंटर कॉलेज में व्यायाम शिक्षक की नौकरी कर रहे मनोज पाटिल के शैक्षणिक दस्तावेजों में मध्यमा( विशारद) का रिपोर्ट कार्ड हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद का है. यह साल 2002 से इसी मार्कशीट के आधार पर‌ नौकरी कर रहे हैं. इसके साथ रामाधीन सिंह इंटर कॉलेज के विप्लव चौधरी (1987 की मार्कशीट) और मुमताज इंटर कॉलेज के अब्दुल रहीम(1988 की मार्कशीट) भी हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की  हैं.

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सुप्रीम कोर्ट साल 2010 के राजस्थान प्रदेश विद्या समिति के एक मामले में कह चुका हेै कि हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद एक ऐसी अन्य संस्था है जो किसी भी तरह की शिक्षा नहीं देती है.

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