बेटे की तरह विवाहित बेटी भी फैमिली मेंबर, मृतक आश्रित कोटे से मिले नौकरी: HC

Smart News Team, Last updated: Wed, 7th Jul 2021, 11:19 AM IST
  • इलाहबाद हाईकोर्ट में मृतक आश्रित कोटे से पुत्री को नौकरी देने संबंधी याचिका दाखिल की गई थी. जिस सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है की बेटे की तरह विवाहित बेटी का भी मृतक आश्रित कोटे से नौकरी का हक़ है. हाईकोर्ट ने अपना यह फैसला एक याचिका पर सुनाया है. 
The Allahabad high court. (HT  FILE PHOTO)

लखनऊ. इलाहबाद हाईकोर्ट ने महिलाओं के हक़ में अच्छा फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बेटों की तरह बेटियां भी परिवार की सदस्य होती है, चाहे फिर वो  विवाहित हो या अविवाहित इससे फर्क नहीं पड़ता है. मृतक आश्रित कोटे में विवाहित पुत्री की अनुकंपा नौकरी की मांग में को लेकर एक याची नामक महिला ने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में मांग की गई थी की पुत्र की तरह विवाहित पुत्री को भी मृतक आश्रित कोटे से अनुकंपा नौकरी मिले. दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने याची के हक़ में फैसला सुनाते हुए अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद बुलंदशहर को मृतक आश्रित कोटे में विवाहिता पुत्री की अनुकंपा नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने अपने फैसले में विमला श्रीवास्तव केस का भी जिक्र किया है. कोर्ट ने कहा है कि विमला श्रीवास्तव सहित कई केसों में कोर्ट ने कानून की व्याख्या करते हुए स्पष्ट कहा है कि विवाहिता पुत्री भी विवाहित पुत्र की ही तरह परिवार के सदस्यों में शामिल है, और बेटियों का भी बराबरी का हक़ है. इसलिए याची को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी देने से इंकार नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने अधिशासी अधिकारी के याची को नियुक्ति न देने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया है. आपको बता दे की याची की मां नगर पालिका परिषद में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत थी. उनकी सेवाकाल में मृत्यु हो गई थी. जिसके बाद याची ने अपनी मृतक मां की जगह नौकरी देने की मांग की थी. 

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अधिशासी अधिकारी ने याची को शादी शुदा होने का हवाला दते हुए परिवार का सदस्य मानने से इंकार कर दिया था. और नियुक्ति देने से इंकार कर दिया गया था. जिसे याचिका दाखिल कर याची ने इलाहबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है. जस्टिस जेजे मुनीर की एकल पीठ ने श्रीमती सीमा रानी की याचिका पर यह आदेश दिया है.

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