UP आंगनबाड़ी केंद्रों में 1 अक्टूबर से शुरू हो सकती है नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई

Uttam Kumar, Last updated: Tue, 28th Sep 2021, 10:35 AM IST
  • राज्य के आंगनबाड़ी केन्द्रों में एक अक्टूबर से पढ़ाई शुरू हो सकती है. इस बार आगनबाड़ी में नई शिक्षा नीति के अनुसार पढ़ाई शुरू होगी. नई शिक्षा नीति के अनुसार आंगनबाड़ी केन्द्रों पर तीन से छह वर्ष तक की उम्र की बच्चों के लिए प्री प्राइमरी की कक्षाएं शुरू की जानी हैं. प्रदेश भर में पहले चरण में एक अक्टूबर को कुल 1.85 लाख आंगनबाड़ी केन्द्र में से 1.15 लाख केन्द्रों को खोल जाएगा.
राज्य के आंगनबाड़ी केन्द्रों में एक अक्टूबर से पढ़ाई शुरू हो सकती है.(फाइल फोटो)

लखनऊ. कोरोना महामारी के स्तिथि को देखते हुए राज्य के आंगनबाड़ी केन्द्रों में एक अक्टूबर से पढ़ाई शुरूहो सकती है. इस बार आगनबाड़ी में नई शिक्षा नीति के अनुसार पढ़ाई शुरू होगी. नई शिक्षा नीति के अनुसार आंगनबाड़ी केन्द्रों पर तीन से छह वर्ष तक की उम्र की बच्चों के लिए प्री प्राइमरी की कक्षाएं शुरू की जानी हैं. इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जा चुका है. बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने आगनबाड़ी खोलने से संबंधित प्रस्ताव शिक्षा विभाग को भेज दिया है. 

प्रदेश भर में कुल 1.85 लाख आंगनबाड़ी केन्द्र हैं. पहले चरण में एक अक्टूबर को 1.15 लाख उन आंगनबाड़ी केन्द्रों को खोल जाएगा, जिनका केन्द्र स्कूल परिसर में बना हुआ है. शिक्षा विभाग पहले चरण में बेसिक प्री प्राइमरी के लिए एक प्राइमरी शिक्षक को नोडल नियुक्त करेगा. नोडल का काम अपनी कक्षाएं देखने के साथ – साथ आंगनबाड़ी केन्द्रों में चल रही पढ़ाई पर भी नजर रखनी होगी. नई शिक्षा नीति को आंगनबाड़ी में लागू करने के लिए समग्र शिक्षा अभियान, बेसिक शिक्षा विभाग व बाल विकास पुष्टाहार विभाग मिल कर तैयारी कर रहा है. 

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नई शिक्षा नीति के अनुसार पढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. अभी तक कुल 90 हजार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है. बाकी बची 30 हजार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का प्रशिक्षण अक्टूबर में कराया जाएगा. इसके साथ ही प्राइमरी शिक्षकों का प्रशिक्षण किया जा रहा है. आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए ‘प्ले वे किट’ की खरीद पिछले साल ही की जा चुकी है. 

नई शिक्षा नीति के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वालें बच्चों के लिए पाठ्यक्रम उम्र के हिसाब से होगा. तीन से चार साल, चार से पांच वर्ष और पांच से छह वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रम तैयार किया गया है. 

 

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