प्रवासी कामगारों को योगी सरकार का तोहफा, 50 लाख तक का बिजनेस लगाने में करेगी मदद

Smart News Team, Last updated: Thu, 25th Mar 2021, 3:59 PM IST
  • योगी सरकार मुख्यमंत्री प्रवासी रोजगार योजना के तहत प्रदेश के प्रवासी कामगारों को 50 लाख रुपए स्वरोजगार लगाने में मदद करेगी. अपने बिजनेस में कामगार को 5 फीसदी लागत लगानी होगी. 25 फीसदी अनुदान सरकार देगी और 70 फीसदी पैसा बैंक से लोन के रूप में दिलवाया जाएगा.
प्रवासी कामगारों के लिए यूपी सरकार ने मुख्यमंत्री प्रवासी रोजगार योजना शुरू की है.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लाख प्रवासी कामगारों और मजदूरों के लिए तोहफा लेकर आई है. यूपी सरकार उनके अपने शहर और गांव में स्वरोजगार करने का मौका देने जा रही है. इसके लिए योगी सरकार ने मुख्यमंत्री प्रवासी रोजगार योजना लागू की है. जिसके तहत प्रवासी कामगार 50 लाख रुपए की इकाई लगा सकते हैं. जिसमें सिर्फ 5 फीसदी पैसा लगाना होगा. बाकी पैसा बैंक से लोन और राज्य सरकार देगी.

मिली जानकारी के अनुसार, प्रवासी कामगार, मजदूर जिनका कुछ काम आता हो जैसे कि इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, मैकेनिक, दर्जी, ड्राइवर, बुनाई और रंगाई में स्किल्ड हों. वे अगर अपना खुद का रोजगार करना चाहते हैं तो ऐसे प्रवासी कामगारों को स्वरोजगार इकाई परियोजनाएं स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री प्रवासी रोजगार योजना के तहत यूपी सरकार मदद करेगी. राज्य सरकार 50 लाख रुपए का उद्यम स्थापिवत करने में मदद करेगी.

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इस योजना के तहत 5 फीसदी पैसा कामगार श्रमिक को खुद लगाना होगा. 70 फीसदी पैसा बैंक से लोन के रूप में दिया जाएगा. जिस पर ब्याज भी देना होगा और बाकी 20 प्रतिशत पैसा राज्य सरकार देगी. आपको बता दें कि इस योजना के तहत सभी प्रवासी कामगार श्रमिक पात्र होंगे. मजदूरों का आंकड़ा सेवायोजन विभाग जुटाएगा. इन आंकड़ों का प्रयोग क्रियान्वन के लिए किया जाएगा.

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स्वराजगार लगाने के लिए और ऋण लेने की न्यूनतम योग्यता 8वीं पास है. 10 लाख से ज्यादा की परिजयोजना के लिए हाईस्कूल पास होना अनिवार्य है. ऐसे कामगार प्रवासी जो लोन न लेकर खुद के श्रोतों से पैसा लगाएंगे उनके लिए न्यूनतम योग्यता की बाध्यता नहीं होगी.

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18 साल से 59 साल तक के लोग योजना में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदनों को जांच के बाद बैंकों को भेजा जाएगा. कामगारों को भारत सरकार 10 दिन का प्रशिक्षण कराएगी. इसके बाद पहली किश्त दी जाएगी और बाकी इकाई के सफल संचालन के एक साल बाद लाभार्थियों के खाते में जाएगी.

 

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