जानें क्या है योगी सरकार की नई यूपी जनसंख्या नीति, पढ़िए फुल जानकारी

Smart News Team, Last updated: Sun, 11th Jul 2021, 7:02 PM IST
विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को 2021-2030 के लिए नई जनसंख्या नीति का अनावरण किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 2026 तक जनसंख्या वृद्धि को 2.1 प्रति हजार करने का लक्ष्य रखा है. यहां जाने कि आखिर योगी सरकार की यह जनसंख्या नीति क्या है.
योगी सरकार ने नई जनसंख्या नीति का ऐलान किया 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर नई जनसंख्या नीति 2021-30 का अनावरण किया. योगी सरकार की इस नई जनसंख्या नीति में 2026 तक जन्म दर 2.1 प्रति हजार जनसंख्या पर लाने और 2030 तक 1.9 करने का लक्ष्य रखा गया है. योगी सरकार की इस प्रस्तावित नीति के माध्यम से परिवार नियोजन के कार्यक्रम कराए जाएंगे. जिसमें उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास किये जायेंगे.

जनसंख्या नियंत्रण की नई नीति को अनावरण करते हुए सीएम योगी ने कहा बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधा बन सकती है और पिछले चार दशकों से इस विषय पर चर्चा भी चल रही है. जनसंख्या वृद्धि भी गरीबी से संबंधित है इस नीति में हर समुदाय को लिया गया है. उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-30' का संबंध प्रत्येक नागरिक के जीवन में खुशहाली व समृद्धि लाने से है. गरीबी व जनसंख्या वृद्धि में संबंध होता है.

यहां जानें कि आखिर क्या है योगी सरकार की नई जनसंख्या नीति

योगी सरकार की इस नई जनसंख्या नियंत्रण नीति को संशोधित भी किया जा सकता है. जनसंख्या नीति-2021 के विशिष्ट उद्देश्य जनसंख्या स्थिरीकरण का लक्ष्य प्राप्त करना. इसके साथ ही निवारण योग्य मातृ मृत्यु और बीमारियों की समाप्ति. नवजात और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की निवारण योग्य मृत्यु की समाप्ति और उनकी पोषण स्थिति में सुधार. किशोर-किशोरियों के लिए यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और पोषण से सम्बंधित सूचनाओं तथा सेवाओं में सुधार और इसके साथ ही वृद्धों की देखभाल और कल्याण में सुधार करना है.

वहीं इस नीति के क्रियान्वयन की बात करें तो जरूरत पड़ने पर इस बारे में नया कानून भी बनेगा. इस नीति के जरिये वर्ष 2026 तक महिलाओं द्वारा सूचित और स्व निर्णय के माध्यम से सकल प्रजनन दर-2.1 और वर्ष 2030 तक सकल प्रजनन दर 1.9 लाने का लक्ष्य तय किया गया. इसके साथ ही आधुनिक गर्भनिरोधक प्रचलन दर को बढ़ाने के लिए रणनीति को प्राथमिकता. 

वहीं दम्पत्तियों को कम संतान पैदा करने के लिए प्रोत्साहित और अधिक बच्चे पैदा करने के प्रति निरूत्साहित करने को समुचित कदम उठाए जाएंगे. इसके साथ ही यह भी प्रयास होगा कि विभिन्न समुदायों के बीच जनसंख्या का संतुलन बना रहे. जिन समुदायों, संवर्गों और भौगोलिक क्षेत्रों में प्रजनन दर अधिक है उनमें जागरूकता के व्यापक कार्यक्रम चलाए जाएंगे.

हिंसा और बाल विवाह का भी रखा जाएगा ध्यान

महिलाओं के खिलाफ हिंसा, बाल विवाह, लिंग चयन, पुत्र प्राप्ति आदि कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलेंगे. संस्थागत प्रसव में बढ़ोत्तरी के मद्देनजर प्रसव के बाद परिवार नियोजन सेवाओं में वृद्धि. शिशु और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु में कमी लाने, अधिक से अधिक नवजात शिशुओं को बचाने तथा बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता. परिवार नियोजन के साथ ही बांझपन की चिकित्सा पर भी फोकस. बांझपन से प्रभावित दम्पत्तियों को प्रदेश की चिकित्सा इकाईयों व प्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं के जरिये परामर्श और नि:शुल्क उपचार दिया जाएगा.

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इसके अलावा गोद लेने की प्रक्रिया को और आसान बनाया जाएगा. प्रदेश में लगभग 1.5 करोड़ लाख बुजुर्ग हैं , चूंकि राज्य की कुल प्रजनन दर लगातार कम हो रही है, जिससे आबादी में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा. अगले बीस साल में, राज्य की आबादी में धीरे-धीरे बुजुर्गों की आबादी का अनुपात ज्यादा होने का अनुमान है. तेजी से बुजुर्गों की रुग्णता दर और बीमारी बढ़ेगी, जिससे स्वास्थ्य पर बहुत अधिक व्यय होगा. अधिक निर्भरता अनुपात, अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और एकल परिवार में तेजी से बढ़ोत्तरी से बुजुर्गों की देखभाल की अतिरिक्त चुनौती बढ़ेगी.

बुजर्गों के लिए होंगे समर्पित अस्पताल

प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर बुजुर्गों के लिए समर्पित सेवायें, स्कीनिंग डिवाईसेस , उपकरण, प्रशिक्षण, अतिरिक्त मानव संसाधन और प्रचार प्रसार सहित उपलब्ध कराई जायेगी. जिला अस्पतालों में 10 बेड वाले समर्पित वार्ड स्थापित किये जायेंगे जिसमें अतिरिक्त मानव संसाधन, उपकरण, उपभोग्य वस्तुएं और दवाईयाँ , प्रशिक्षण और आईईसीहोगी. बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और सलाह को शामिल करने के लिए ई.संजीवनी जैसे टेली - परामर्श प्लेटफार्मों का विस्तार किया जाएगा.

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सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों में बुजुर्गों के लिए समर्पित सेवाएं, स्क्रीनिंग डिवाइसेस, उपकरण, प्रशिक्षण, अतिरिक्त मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. बुजुर्गो के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और सलाह को शामिल करने के लिए ई-संजीवनी जैसे टेली-परामर्श प्लेटफार्म का विस्तार होगा. राज्य में जनसंख्या और स्वास्थ्य शोध के मापन, सीख व मूल्यांकन के लिए एक विशेष स्वास्थ्य शोध इकाई स्थापित होगी.

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